सरसों का तेल सप्लाई करने के नाम पर सुरक्षा राशि जमा कराई गई; जांच में कंपनी फर्जी निकली, श्रीनगर अदालत में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों के साथ मामला पहुंचा

फर्जी कुकिंग ऑयल कंपनी बनाकर ₹15 लाख की ठगी, ईओडब्ल्यू कश्मीर ने चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

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By Roopa
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श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की आर्थिक अपराध शाखा (Economic Offences Wing-EOW) कश्मीर ने फर्जी कुकिंग ऑयल कंपनी के नाम पर ₹15 लाख की कथित ठगी के मामले में जांच पूरी कर चार आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने शिकायतकर्ता को खाद्य तेल की आपूर्ति का झांसा देकर सुरक्षा राशि के रूप में ₹15 लाख जमा कराए, लेकिन न तो तेल की आपूर्ति की गई और न ही कंपनी का कोई वास्तविक अस्तित्व पाया गया। मामले में चारों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।

आर्थिक अपराध शाखा के अनुसार, वर्ष 2022 में दर्ज एफआईआर संख्या 77/2022 की जांच पूरी होने के बाद श्रीनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई है। जांच के दौरान एकत्र किए गए दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत अभियोजन चलाने की सिफारिश की गई है।

चार्जशीट में मोहम्मद अमीन भट, खालिद हुसैन खान, अनिल कुमार माहेश्वरी और शशांक कुमार को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, सभी आरोपियों ने कथित तौर पर मिलकर शिकायतकर्ता को विश्वास में लिया और दावा किया कि वे एम/एस एश्योर्ड एग्रो फूड इंडस्ट्रीज नामक कंपनी का प्रतिनिधित्व करते हैं। शिकायतकर्ता को बताया गया कि कंपनी खाद्य तेल का निर्माण करती है और सुरक्षा राशि जमा होने के एक सप्ताह के भीतर सरसों के तेल की खेप उपलब्ध करा दी जाएगी।

जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता ने आरोपियों के आश्वासन पर ₹15 लाख सुरक्षा राशि के रूप में जमा करा दिए। हालांकि निर्धारित समय बीतने के बाद भी तेल की आपूर्ति नहीं की गई। बार-बार संपर्क करने के बावजूद जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला और न ही राशि लौटाई गई, तब पीड़ित ने आर्थिक अपराध शाखा से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।

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मामले की जांच के दौरान अधिकारियों ने कंपनी के दस्तावेजों और पंजीकरण संबंधी रिकॉर्ड की गहन जांच की। राजस्थान के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से सत्यापन कराने पर पता चला कि एम/एस एश्योर्ड एग्रो फूड इंडस्ट्रीज नाम से कोई कंपनी पंजीकृत ही नहीं है। जांच एजेंसी के अनुसार, इससे यह स्पष्ट हुआ कि कथित कंपनी केवल लोगों को धोखा देने के उद्देश्य से बनाई गई एक फर्जी पहचान थी, जिसका वास्तविक कारोबारी अस्तित्व नहीं था।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी शशांक कुमार को कथित कंपनी का मालिक बताकर प्रस्तुत किया गया था और उसने पूरी साजिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि सभी आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी कंपनी का सहारा लेकर शिकायतकर्ता से बड़ी रकम हासिल की और वादा पूरा किए बिना धन का दुरुपयोग किया।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि आर्थिक अपराधों में अब फर्जी कंपनियों, नकली व्यापारिक प्रस्तावों और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी कंपनी के साथ बड़ा वित्तीय या व्यावसायिक लेनदेन करने से पहले उसके पंजीकरण, जीएसटी, बैंकिंग विवरण और कॉर्पोरेट रिकॉर्ड का स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना चाहिए। केवल मौखिक आश्वासन या आकर्षक व्यावसायिक प्रस्तावों के आधार पर बड़ी राशि जमा करना गंभीर वित्तीय जोखिम पैदा कर सकता है।

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले की सुनवाई सक्षम अदालत में होगी, जहां अभियोजन पक्ष जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को साबित करने का प्रयास करेगा। वहीं, आर्थिक अपराध शाखा ने आम लोगों और कारोबारियों से अपील की है कि किसी भी कंपनी के साथ निवेश या व्यापारिक समझौता करने से पहले उसकी वैधता की पूरी जांच अवश्य करें। यदि किसी वित्तीय धोखाधड़ी या संदिग्ध आर्थिक गतिविधि की जानकारी मिले तो तत्काल संबंधित जांच एजेंसी को शिकायत दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर नुकसान को रोका जा सके।

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