कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गेम्सक्राफ्ट के संस्थापकों दीपक सिंह, विकास तनेजा और पृथ्वीराज सिंह की गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं थी और यह अधिकारों के उल्लंघन के दायरे में आती है।
न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ईडी द्वारा की गई गिरफ्तारी ‘कानून के विपरीत’ पाई गई और याचिकाकर्ताओं को बिना किसी विलंब के रिहा करने का निर्देश दिया गया। अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी जांच एजेंसी को प्रक्रिया का पालन करते हुए ही कार्रवाई करनी चाहिए।
यह मामला मई महीने में दर्ज उस मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा है, जिसमें ईडी ने आरोप लगाया था कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से करीब 250 करोड़ रुपये की अवैध लेनदेन की गई। एजेंसी का दावा था कि कंपनी ने यूजर्स को आकर्षित करने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं का इस्तेमाल किया और संदिग्ध लेनदेन के जरिए रकम को घुमाया गया।
इससे पहले ईडी ने 7 मई को कंपनी, उसके संस्थापकों और कर्मचारियों से जुड़े 17 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था, जिसमें कई दस्तावेज जब्त किए जाने का दावा किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि यह पूरा मामला तेलंगाना में दर्ज एफआईआर से जुड़ा हुआ है और इसमें करीब 1,000 करोड़ रुपये तक के ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी नेटवर्क की जांच की जा रही है।
अदालत के इस फैसले को मामले में एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है, जबकि जांच एजेंसी की कार्रवाई की वैधता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आदेश के बाद तीनों संस्थापकों की तत्काल रिहाई का रास्ता साफ हो गया है, हालांकि मनी लॉन्ड्रिंग जांच अभी जारी रहेगी।
अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में यह भी संकेत दिया कि किसी भी आर्थिक अपराध जांच में गिरफ्तारी को अंतिम उपाय के रूप में ही अपनाया जाना चाहिए और प्रक्रिया का कड़ाई से पालन आवश्यक है। पीठ ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जांच एजेंसी की शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखना न्यायिक प्रणाली की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
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इस फैसले के बाद ऑनलाइन गेमिंग उद्योग से जुड़े अन्य मामलों में भी कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है और इसे एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश से भविष्य में जांच एजेंसियों को गिरफ्तारी की प्रक्रिया और अधिक सावधानी के साथ अपनानी होगी ताकि किसी भी कानूनी त्रुटि से बचा जा सके।
ईडी का आरोप था कि गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े अन्य प्लेटफॉर्म्स ने उपयोगकर्ताओं को गेमिंग के नाम पर आकर्षित करते हुए कई तरह के लेनदेन में अनियमितताएं की थीं। एजेंसी ने यह भी दावा किया था कि प्लेटफॉर्म पर रीयल मनी गेमिंग के जरिए बड़े पैमाने पर धन का प्रवाह हुआ है।
फिलहाल अदालत के आदेश के बाद तीनों संस्थापकों की रिहाई को लेकर औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं और मामले की आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह फैसला न केवल इस मामले बल्कि भविष्य में मनी लॉन्ड्रिंग और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े मामलों की जांच प्रक्रिया पर भी प्रभाव डाल सकता है क्योंकि अदालत ने प्रक्रिया की सख्त अनुपालना को अनिवार्य बताया है।
इस आदेश ने जांच एजेंसियों के अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर एक नई बहस भी शुरू कर दी है जो आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में न्यायालय का यह रुख भविष्य में जांच एजेंसियों को और अधिक मजबूत दस्तावेजी आधार और कानूनी प्रक्रिया के पालन के साथ कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करेगा जिससे किसी भी गिरफ्तारी या जांच को अदालत में चुनौती दिए जाने पर टिके रहने की संभावना अधिक होगी।
मामले से जुड़े सभी पक्ष अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं जबकि यह आदेश देश में आर्थिक अपराध जांच प्रणाली पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है। अगली सुनवाई जल्द होगी है।
