तेलंगाना के करीमनगर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत 34 म्यूल बैंक खातों की पहचान की गई है। राज्य साइबर सुरक्षा विंग के ‘ऑपरेशन क्रैकडाउन’ के तहत की गई जांच में यह खुलासा हुआ है कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगों द्वारा बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया गया। जांच अधिकारियों के अनुसार, इन खातों के माध्यम से लगभग 1000 संदिग्ध लेनदेन होने की जानकारी सामने आई है, जिनकी विस्तृत पड़ताल जारी है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 162 शिकायतों की जांच के दौरान यह नेटवर्क उजागर हुआ। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार बनाकर उनके बैंक खातों से रकम स्थानांतरित की गई। जांच में सामने आया कि ठगों ने म्यूल अकाउंट धारकों को कमीशन का लालच देकर या पहचान छिपाकर वित्तीय अपराध में सहयोग के लिए प्रेरित किया।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल डिजिटल ठगी के सबसे खतरनाक तरीकों में से एक बन चुका है। इस मामले पर टिप्पणी करते हुए प्रतिष्ठित साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह अक्सर बैंकिंग सिस्टम की कमजोर कड़ियों का फायदा उठाने के लिए म्यूल अकाउंट नेटवर्क तैयार करते हैं। सोशल इंजीनियरिंग और आर्थिक लालच के जरिए सामान्य लोगों को भी इस अपराध में शामिल कर लिया जाता है। डिजिटल वित्तीय सुरक्षा के लिए जागरूकता और तेज़ निगरानी बेहद जरूरी है।”
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जांच एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि जिन खाताधारकों को संदिग्ध तरीके से कमीशन या अन्य लाभ के बदले अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने के लिए दिया गया है, उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे खाताधारकों को साइबर अपराधियों के साथ मिलीभगत का दोषी माना जा सकता है।
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी आमतौर पर लोगों को नौकरी दिलाने, निवेश योजना, लॉटरी जीतने या ऑनलाइन सेवाओं के नाम पर धोखा देकर रकम ट्रांसफर करवाते हैं। इसके बाद धन को तेजी से कई खातों में घुमाकर उसकी असली पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है। म्यूल बैंक खाते इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए धन का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक खाते, ओटीपी, पासवर्ड या वित्तीय जानकारी साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति अधिक कमीशन या आसान पैसे का लालच देकर बैंक खाता इस्तेमाल करने की बात करता है, तो तुरंत संबंधित पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर सूचना दें। समय पर शिकायत दर्ज कराने से धोखाधड़ी की रोकथाम संभव हो सकती है।
जांच टीमों का कहना है कि साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के साथ तकनीकी निगरानी प्रणाली को भी मजबूत किया जा रहा है। बैंकिंग संस्थानों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया जा रहा है। संदिग्ध ट्रांजेक्शन की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए भी नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि म्यूल बैंक खाता धारकों के खिलाफ कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी। यदि जांच में उनकी संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खातों को फ्रीज करने के साथ ही आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध के खिलाफ यह अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा ताकि डिजिटल वित्तीय सुरक्षा को मजबूत बनाया जा सके और ठगी के नेटवर्क को तोड़ा जा सके।
