ग्रेटर नोएडा साइबर पुलिस ने IGL कर्मचारी बनकर गैस बिल बकाया होने का डर दिखाकर ₹21.27 लाख की ठगी करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।

90 दिनों के भीतर चार्जशीट: कानपुर किडनी रैकेट में 14 आरोपी, डोनर आयुष और रिसीपेंट पारुल तोमर बने मुख्य गवाह

Team The420
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कानपुर के बहुचर्चित अवैध किडनी प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) रैकेट मामले में पुलिस ने कानूनी समय-सीमा के भीतर कार्रवाई पूरी करते हुए 90 दिनों से पहले अदालत में करीब 1,000 पेज की चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस ने चार्जशीट में 14 लोगों को आरोपी बनाया है, जबकि मामले को मजबूत करने के लिए 40 लोगों को गवाह के रूप में शामिल किया गया है। हालांकि, इस मामले में पांच आरोपी अब भी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।

पुलिस ने इस मामले में किडनी डोनर आयुष और किडनी रिसीपेंट पारुल तोमर को मुख्य गवाह बनाया है। इसके अलावा विवेचना के दौरान सामने आए अस्पतालों के कर्मचारी, पूर्व डोनर और रिसीपेंट, चिकित्सक तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों को भी गवाह सूची में शामिल किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, करोड़ों रुपये के कथित अवैध वित्तीय लेनदेन सामने आने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में अलग से जांच शुरू की है और संबंधित रिकॉर्ड एजेंसी को उपलब्ध कराए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

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विवेचना अधिकारी के अनुसार, चार्जशीट में आहूजा अस्पताल की संचालक डॉ. प्रीति आहूजा और उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, आरोही अस्पताल के संचालक राजेश कुमार, मेडलाइफ हॉस्पिटल के संचालक राम प्रकाश, प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह, कथित बिचौलिया शिवम अग्रवाल, गाजियाबाद के ओटी मैनेजर राजेश कुमार, हापुड़ निवासी ओटी इंचार्ज कुलदीप सिंह राघव, बागपत निवासी परवेज सैफी, गाजियाबाद निवासी रोहित तिवारी, मुदस्सिर अली सिद्दीकी सहित कुल 14 आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें से 13 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि एक आरोपी को उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत प्राप्त हुई है।

पुलिस ने अदालत के समक्ष कई वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं। इनमें घटनास्थल और संबंधित स्थानों के नक्शे, आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सीसीटीवी फुटेज, बैंक खातों के लेनदेन, फोन रिकॉर्डिंग, व्हाट्सएप चैट, डिजिटल दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर कथित साजिश और आरोपियों की भूमिका को स्थापित करने का प्रयास किया गया है।

गवाहों की सूची में पारुल तोमर के पति विकास, उनके भाई दिव्यांश तोमर, हैलट अस्पताल के तीन डॉक्टर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के दो चिकित्सक, एडीसीएमओ, लगभग 20 पुलिस उपनिरीक्षक तथा लखनऊ के कुछ चिकित्सकों को भी शामिल किया गया है। पुलिस का मानना है कि इन गवाहों के बयान मुकदमे की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

जांच के दौरान कुछ आरोपियों ने स्वरूपनगर स्थित रमाशिव अस्पताल का भी नाम लिया था। हालांकि पुलिस ने बताया कि विस्तृत जांच के बावजूद अस्पताल के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष या स्वतंत्र साक्ष्य नहीं मिला। केवल आरोपियों के बयानों के आधार पर कार्रवाई उचित नहीं मानी गई। किसी डोनर या रिसीपेंट से भी उस अस्पताल का संबंध स्थापित नहीं हो सका, इसलिए उसे चार्जशीट में शामिल नहीं किया गया।

जांच के दौरान एक वीडियो भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आया, जिसमें कथित तौर पर कुछ आरोपी ₹500 के नोटों की गड्डियों से बने बिस्तर पर लेटे दिखाई दिए। यह वीडियो आरोपी शिवम अग्रवाल के मोबाइल फोन से बरामद हुआ था। पुलिस के अनुसार, मामले में पहले परवेज सैफी के कब्जे से ₹10 लाख नकद भी बरामद किए गए थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह धनराशि कथित ट्रांसप्लांट से जुड़े भुगतान का हिस्सा हो सकती है, जिसकी जांच जारी है।

मामले की शुरुआत उस समय हुई जब मुजफ्फरनगर निवासी पारुल तोमर का 29 मार्च को कानपुर के केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में कथित रूप से अवैध किडनी प्रत्यारोपण कराया गया। जांच में सामने आया कि बिहार के बेगूसराय निवासी छात्र आयुष ने अपनी किडनी दान की थी। इसके बाद पुलिस ने कथित रैकेट का खुलासा करते हुए कई अस्पताल संचालकों, चिकित्सा कर्मियों और बिचौलियों को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों की तलाश जारी है और मामले में आगे की जांच न्यायिक प्रक्रिया के साथ जारी रहेगी।

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