कानपुर में फर्जी मार्कशीट, डिग्री और प्रमाणपत्र तैयार कर बेचने वाले रैकेट में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर ₹60 करोड़ के लेनदेन की जांच तेज की गई है।

फर्जी मार्कशीट रैकेट पर शिकंजा: इटावा और जालौन के दो आरोपी गिरफ्तार, ₹60 करोड़ के लेनदेन की जांच तेज

Team The420
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उत्तर प्रदेश के कानपुर में फर्जी मार्कशीट, डिग्री और शैक्षणिक प्रमाणपत्र तैयार कर देशभर में बेचने वाले एक संगठित गिरोह के खिलाफ चल रही कार्रवाई में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। विशेष जांच टीम (SIT) और फीलखाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में इटावा और जालौन के रहने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क देश के 25 राज्यों तक फैला हुआ था और इससे जुड़े बैंक खातों में वर्ष 2024 से 2026 के बीच लगभग ₹60 करोड़ का लेनदेन हुआ है। पुलिस अब इस पूरे वित्तीय नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमित कुमार सक्सेना और गोपाल जी के रूप में हुई है। अमित कुमार सक्सेना मूल रूप से इटावा जिले का निवासी है और वर्तमान में कानपुर के बर्रा क्षेत्र में रह रहा था, जबकि गोपाल जी जालौन जिले के कदौरा क्षेत्र का निवासी है और फिलहाल कानपुर के विनायकपुर इलाके में रह रहा था। दोनों को सटीक सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया गया।

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तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के नाम पर तैयार की गई 59 कथित फर्जी मार्कशीट, डिग्री और प्रमाणपत्र बरामद किए हैं। इसके अलावा ₹4.50 लाख नकद भी जब्त किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि बरामद दस्तावेजों की फोरेंसिक और तकनीकी जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनका उपयोग किन-किन व्यक्तियों ने किया और वे किन संस्थानों के नाम पर तैयार किए गए थे।

जांच के दौरान पुलिस को बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन की जानकारी भी मिली है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने कथित रूप से फर्जी शैक्षणिक संस्थान भी संचालित कर रखे थे, जिनके माध्यम से धन का लेनदेन किया जाता था। जांच में सामने आया है कि गिरोह के कथित सरगना अखिलेश के पांच बैंक खातों से लगभग ₹50 करोड़ का लेनदेन हुआ। वहीं, अमित कुमार से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों के बैंक खातों में लगभग ₹7 करोड़ का ट्रांजेक्शन पाया गया, जबकि उसके निजी बैंक खाते में लगभग ₹80 लाख जमा होने की जानकारी मिली है। गोपाल जी के दो बैंक खातों में क्रमशः लगभग ₹4.50 करोड़ और ₹1.18 करोड़ के लेनदेन का भी पता चला है।

पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि पूरे नेटवर्क का संचालन उन्नाव निवासी अखिलेश शुक्ला कर रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस कथित रैकेट में उसका भाई निखिलेश भी सक्रिय भूमिका निभा रहा था। पुलिस का कहना है कि दोनों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं और उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में भी संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि अखिलेश शुक्ला को दिसंबर 2025 में फर्जी मार्कशीट और डिग्री से जुड़े एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। पुलिस के अनुसार, अप्रैल 2026 में जेल से रिहा होने के बाद उसने कथित रूप से दोबारा नेटवर्क सक्रिय कर दिया और फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज तैयार कर बेचने का अवैध कारोबार फिर शुरू कर दिया।

पुलिस ने बताया कि बरामद दस्तावेजों में कानपुर की छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJM) के नाम पर तैयार की गई कथित फर्जी मार्कशीटें भी शामिल हैं। जांच में इस गिरोह के तार पहले किदवईनगर और चमनगंज क्षेत्रों से पकड़े गए आरोपियों से भी जुड़े पाए गए हैं। इस कार्रवाई के साथ अब तक इस रैकेट में कुल 16 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कथित मास्टरमाइंड अखिलेश के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी कर रही है। साथ ही, इतने बड़े वित्तीय लेनदेन को देखते हुए धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के संभावित पहलुओं की जांच के लिए मामले का विवरण प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

जांच एजेंसियां बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन, शैक्षणिक दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क, वित्तीय प्रवाह और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट की जा सके। पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सभी आरोप जांच के अधीन हैं और उनकी अंतिम पुष्टि विस्तृत विवेचना तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

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