कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में फर्जी दस्तावेजों और हस्ताक्षर के जरिए ₹90 लाख का लोन लेने के मामले में फरार चल रही 10 हजार रुपये की इनामी महिला को काकादेव पुलिस ने नोएडा से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान शिखा निगम के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, मामले में आरोपी महिला के पति सौरभ निगम और संबंधित बैंक मैनेजर अंकित मिश्रा को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस अब महिला से पूछताछ कर फर्जीवाड़े में उसकी भूमिका और लोन की रकम के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी जुटा रही है।
साझेदारी खत्म होने के बाद किया गया फर्जीवाड़ा
मामला विजयनगर निवासी नीतू सिंह की फर्म ‘एसडी इंटरप्राइजेज’ से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2021 में फर्म के साझेदार सौरभ निगम और उसकी पत्नी शिखा निगम ने नीतू सिंह को भी कारोबार में साझेदार बनाया था। हालांकि, जनवरी 2022 में नीतू सिंह ने फर्म की साझेदारी से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद भी उनके नाम और दस्तावेजों का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।
आरोप है कि फर्म से अलग होने के बाद नीतू सिंह के फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर HDFC Bank की रतनलाल नगर शाखा में फर्म के नाम पर एक ओवरड्राफ्ट यानी OD खाता खुलवाया गया। इसके बाद इसी खाते के जरिए ₹90 लाख की ऋण राशि निकाल ली गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उन्हें इस लेन-देन या खाते के संचालन की जानकारी नहीं थी।
बैंक नोटिस मिलने पर सामने आया मामला
नीतू सिंह को वर्ष 2024 में बैंक की ओर से एक नोटिस मिला। नोटिस मिलने के बाद उन्हें पता चला कि उनके नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्म से जुड़ा बैंक खाता संचालित किया गया और उसके माध्यम से ₹90 लाख का लोन लिया गया है। इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस को दी और आरोपी दंपती तथा बैंक से जुड़े कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों की भूमिका और बैंकिंग दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की। जांच में शिखा निगम के खिलाफ भी कार्रवाई की गई, लेकिन वह लगातार फरार चल रही थी। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उस पर ₹10 हजार का इनाम घोषित किया था।
नोएडा से हुई गिरफ्तारी
पुलिस ने आरोपी महिला की तलाश में संभावित ठिकानों और उसके संपर्कों की जानकारी जुटाई। इसी क्रम में उसके नोएडा में होने की सूचना मिलने पर टीम ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उसके बैंक खातों, दस्तावेजों और मामले से जुड़े अन्य लोगों के साथ संपर्क की जांच कर रही है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि ₹90 लाख की लोन राशि आखिर कहां इस्तेमाल की गई और रकम निकालने की पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी। बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजों के सत्यापन के आधार पर पुलिस मामले की आगे की कड़ियां जोड़ रही है।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में सौरभ निगम और बैंक मैनेजर अंकित मिश्रा को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। शिखा निगम की गिरफ्तारी के बाद जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने, बैंक खाता खुलवाने और लोन राशि निकालने की पूरी प्रक्रिया की भूमिका स्पष्ट करने में जुटी है। आरोपी महिला के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
