भावनगर में डॉर्मेंट खातों और 135 बैंक अकाउंट्स के जरिए ₹7.34 करोड़ की हाई-टेक साइबर ठगी का खुलासा, चार आरोपी गिरफ्तार

‘छोटा कमीशन, बड़ा कनेक्शन’: डिलीवरी बॉय के खाते से ₹35 करोड़ की संदिग्ध एंट्री

Team The420
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कानपुर: शहर के बेकनगंज क्षेत्र से सामने आया एक मामला वित्तीय अपराध के बदलते तौर-तरीकों की गंभीर तस्वीर पेश करता है। एक डिलीवरी बॉय के बैंक खाते में ₹35 करोड़ के लेनदेन का खुलासा हुआ है, जिसने जांच एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि युवक का खाता “म्यूल अकाउंट” के रूप में इस्तेमाल किया गया, जिसके जरिए संदिग्ध धनराशि को इधर-उधर ट्रांसफर किया गया। इस घटना ने आम लोगों के बैंक खातों के दुरुपयोग के खतरे को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

मामले के केंद्र में बेकनगंज निवासी औवैस है, जो एक ऑनलाइन ग्रॉसरी कंपनी में डिलीवरी बॉय के रूप में कार्यरत है। जानकारी के अनुसार, औवैस ने कुछ समय पहले व्यापार के उद्देश्य से एक निजी बैंक में करंट अकाउंट खुलवाया था, लेकिन व्यापार सफल नहीं हो सका। इसके बाद उसने डिलीवरी का काम शुरू कर दिया। इसी दौरान करीब नौ महीने पहले उसकी मुलाकात सरताज और अमान नामक दो युवकों से हुई, जिन्होंने उसे आसान कमाई का लालच दिया।

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आरोपियों ने औवैस को भरोसा दिलाया कि यदि वह अपना बैंक खाता उनके उपयोग के लिए दे दे, तो उसे हर महीने ₹8 से ₹10 हजार तक कमीशन मिलेगा। आर्थिक लाभ के लालच में आकर औवैस ने अपना अकाउंट नंबर, पासबुक, चेकबुक और एटीएम कार्ड तक उनके हवाले कर दिए। शुरुआत में सब कुछ सामान्य प्रतीत होता रहा और उसे नियमित रूप से कमीशन मिलता रहा। पिछले महीने उसे ₹18 हजार दिए गए, जिससे उसे संदेह हुआ कि कहीं कुछ गड़बड़ तो नहीं है।

संदेह होने पर औवैस ने बैंक जाकर अपने खाते की जांच कराई। खाते का विवरण देखकर उसके होश उड़ गए, क्योंकि उसमें ₹35 करोड़ से अधिक के लेनदेन का रिकॉर्ड सामने आया। घबराए औवैस ने तुरंत स्थानीय थाने पहुंचकर मामले की जानकारी दी, जिसके बाद जांच शुरू की गई।

प्रारंभिक पूछताछ के आधार पर सरताज और अमान को हिरासत में लिया गया है। जांच एजेंसियों ने संबंधित बैंक से विस्तृत ट्रांजैक्शन डिटेल मांगी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इतनी बड़ी रकम कहां से आई और किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला साइबर फ्रॉड, मनी लॉन्ड्रिंग या फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ा हो सकता है।

जांच में यह भी सामने आया है कि औवैस का बैंक खाता एक “म्यूल अकाउंट” के रूप में इस्तेमाल किया गया। ऐसे खातों का उपयोग अपराधी अवैध धन के ट्रांसफर और उसके स्रोत को छिपाने के लिए करते हैं। इस प्रक्रिया में आम लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खातों का उपयोग किया जाता है, जिससे असली अपराधी अपनी पहचान छिपा सकें और जांच एजेंसियों से बच सकें।

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने इस मामले को लेकर चेतावनी देते हुए कहा, “म्यूल अकाउंट आज साइबर और वित्तीय अपराध का सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। अपराधी सीधे अपने नाम से लेनदेन नहीं करते, बल्कि आम लोगों को लालच देकर उनके खातों का इस्तेमाल करते हैं। कई बार खाता धारक को पूरी जानकारी भी नहीं होती कि उसके खाते से करोड़ों का लेनदेन हो रहा है। यह एक संगठित नेटवर्क होता है, जिसमें हर स्तर पर अलग-अलग लोग शामिल होते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के मामलों में सबसे बड़ी चुनौती डिजिटल ट्रेल को समझना और असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना होती है। “लोगों को समझना होगा कि थोड़े से पैसे के लालच में अपना बैंक खाता देना उन्हें गंभीर कानूनी संकट में डाल सकता है,” उन्होंने जोड़ा।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में म्यूल अकाउंट के जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है। अवैध धन को कई खातों के माध्यम से घुमाकर उसकी ट्रेसिंग को जटिल बना दिया जाता है। यही कारण है कि जांच एजेंसियां अब ऐसे मामलों को बेहद गंभीरता से लेकर डिजिटल और बैंकिंग ट्रेल की गहन जांच कर रही हैं।

फिलहाल, हिरासत में लिए गए आरोपियों से पूछताछ जारी है और संभावित अन्य सहयोगियों की तलाश की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, क्योंकि ₹35 करोड़ का लेनदेन किसी छोटे स्तर की गतिविधि नहीं माना जा सकता।

यह मामला आम नागरिकों के लिए एक सख्त चेतावनी है कि वे किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या वित्तीय दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति को न सौंपें। मामूली कमीशन के बदले उठाया गया यह जोखिम उन्हें गंभीर कानूनी और आर्थिक संकट में डाल सकता है।

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