उत्तर प्रदेश के कानपुर में साइबर अपराधियों ने राजनीतिक फंड ट्रांसफर के नाम पर 30 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर एक स्कूल संचालक दंपती को कथित तौर पर म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया। आरोप है कि ठगों ने दंपती के मोबाइल में एक दुर्भावनापूर्ण (APK) फाइल इंस्टॉल कर बैंक खातों और सिम कार्ड पर नियंत्रण हासिल किया तथा विभिन्न खातों के माध्यम से करीब ₹1.09 करोड़ का लेनदेन कराया। मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह का कथित मास्टरमाइंड नोमान फारूकी और उसके अन्य साथी फरार हैं।
जांच के अनुसार, कानपुर देहात के रूरा स्थित एक निजी स्कूल का संचालन करने वाले दंपती उस समय साइबर थाने पहुंचे जब उन्हें बेंगलुरु पुलिस की ओर से नोटिस मिला। नोटिस में बताया गया था कि उनकी शैक्षणिक संस्थाओं के बैंक खातों से जुड़े 29 साइबर धोखाधड़ी के मामले राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज हैं।
पूछताछ में सामने आया कि मार्च 2026 में दंपती की मुलाकात एक परिचित के माध्यम से नोमान फारूकी से हुई थी। आरोपियों ने दावा किया कि उनके बैंक खातों में ₹5 करोड़ का राजनीतिक फंड भेजा जाएगा, जिसमें से 30 प्रतिशत राशि कमीशन के रूप में उन्हें मिलेगी और शेष रकम वापस करनी होगी। खातों की उच्च ट्रांजेक्शन लिमिट का हवाला देकर उन्हें इस योजना में शामिल किया गया।
इसके बाद आरोपियों ने दंपती को लखनऊ के एक होटल बुलाया, जहां उनके मोबाइल फोन में एक APK फाइल डाउनलोड कराई गई। साथ ही बैंक खातों से जुड़े सिम कार्ड भी अपने कब्जे में ले लिए गए। आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए अपराधियों ने मोबाइल और बैंकिंग सेवाओं पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लिया। बाद में दंपती को कई दिनों तक लखनऊ और फिर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के एक होटल में रखा गया, जहां उनके खातों के माध्यम से लगातार वित्तीय लेनदेन किए गए।
जांच में सामने आया कि अपराधियों ने दंपती के आईसीआईसीआई बैंक और बंधन बैंक खातों का उपयोग कर लगभग ₹1.09 करोड़ की राशि विभिन्न स्रोतों से प्राप्त की और उसे कई अन्य खातों में स्थानांतरित कर दिया। इन खातों का उपयोग कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम को आगे भेजने के लिए किया गया।
साइबर क्राइम पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल लोकेशन के आधार पर अबी वकाश और मंगल सिंह को लखनऊ से गिरफ्तार किया। उनकी निशानदेही पर बृजेंद्र यादव और राहुल शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन, छह बैंक चेकबुक, चार पासबुक, चार एटीएम कार्ड, टैक्स इनवॉइस बुक, लेटरहेड, एक कार तथा विभिन्न फर्मों की मुहरें बरामद की हैं।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी और कोलकाता सहित कई शहरों में सक्रिय था। पुलिस फरार मास्टरमाइंड नोमान फारूकी और उसके अन्य साथियों की तलाश कर रही है।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि म्यूल अकाउंट आज संगठित साइबर अपराध का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। अपराधी भारी कमीशन, राजनीतिक फंड, निवेश या कारोबारी भुगतान का झांसा देकर लोगों के बैंक खाते और मोबाइल का नियंत्रण हासिल करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने बैंक खाते, मोबाइल, सिम कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग की पहुंच किसी अन्य व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए और किसी भी अनजान स्रोत से प्राप्त APK फाइल कभी डाउनलोड नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से पूरा मोबाइल और बैंकिंग सिस्टम अपराधियों के नियंत्रण में जा सकता है।
