“36% ब्याज, धमकी भरे कॉल और मानसिक प्रताड़ना का आरोप; नोएडा से तीन आरोपी गिरफ्तार, डिजिटल लोन नेटवर्क पर गहराई से जांच”

“छोटा लोन, बड़ा ट्रैप: ऐप के दबाव में छात्र की मौत, साइबर उत्पीड़न का खुलासा”

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By Roopa
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कन्नूर। केरल के कन्नूर में एक बीडीएस छात्र की संदिग्ध मौत ने देशभर में तेजी से फैल रहे डिजिटल लोन ऐप्स के खतरनाक नेटवर्क को उजागर कर दिया है। इस मामले में तीन आरोपियों को उत्तर प्रदेश के नोएडा से गिरफ्तार किया गया है, जिन पर एक मोबाइल ऐप के जरिए छात्र को कर्ज देने के बाद लगातार दबाव बनाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप है। शुरुआती जांच में मामला केवल आर्थिक लेनदेन का नहीं, बल्कि सुनियोजित डिजिटल उत्पीड़न का प्रतीत हो रहा है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ऋषिकेश तिवारी (32), प्रशांत घेवाल (28) और प्रकाश जई (54) के रूप में हुई है। तीनों को नोएडा से हिरासत में लेकर केरल लाया गया, जहां उन्हें अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के विस्तार और इसमें शामिल अन्य संभावित लोगों की तलाश में जुटी हैं।

मामले के अनुसार, मृतक नितिन राज आर एल, जो कन्नूर डेंटल कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र था, ने ‘इंस्टा पे’ नामक मोबाइल ऐप के जरिए ‘इंस्टेंट फंड्स’ प्लेटफॉर्म से ₹15,000 का लोन लिया था। आरोप है कि इस लोन पर 36% की अत्यधिक ब्याज दर लागू की गई थी, जो नियमों के खिलाफ है। लोन देने के बाद आरोपी लगातार छात्र पर पैसे लौटाने का दबाव बना रहे थे।

एफआईआर के मुताबिक, 9 अप्रैल को नितिन को कई बार कॉल कर पैसे चुकाने के लिए मजबूर किया गया। इस दौरान उसे धमकियां दी गईं और मानसिक रूप से परेशान किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि ऐसे ऐप्स अक्सर यूजर के मोबाइल डेटा—जैसे कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो और निजी जानकारी—तक पहुंच बना लेते हैं और फिर इन्हीं जानकारियों के जरिए ब्लैकमेल कर दबाव बढ़ाते हैं।

घटना के अगले दिन, 10 अप्रैल को नितिन मेडिकल कॉलेज परिसर के पास गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। बताया जा रहा है कि वह एक इमारत से गिरा था। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना को आत्महत्या के लिए उकसाने के एंगल से भी जांचा जा रहा है, क्योंकि लगातार दबाव और उत्पीड़न के आरोप सामने आए हैं।

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मामले में आरोपियों के खिलाफ जबरन वसूली से जुड़ी धाराओं के साथ-साथ केरल मनी लेंडर्स एक्ट और अत्यधिक ब्याज वसूली निषेध कानून के तहत केस दर्ज किया गया है। इसके अलावा उन कानूनी प्रावधानों को भी शामिल किया गया है, जो उत्पीड़न के कारण आत्महत्या जैसे मामलों से संबंधित हैं।

जांच के दौरान संबंधित लोन ऐप के खिलाफ भी अलग से मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि यह ऐप अवैध रूप से उच्च ब्याज दर वसूल रहा था और ग्राहकों को डराने-धमकाने की रणनीति अपनाता था। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस ऐप के संचालन के पीछे कौन लोग या कंपनियां शामिल हैं और क्या इसके तार अन्य राज्यों या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।

यह घटना देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल लोन ऐप्स के खतरे की गंभीरता को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना पर्याप्त नियमन के चल रहे ऐसे प्लेटफॉर्म खासकर युवाओं को आसान कर्ज का लालच देकर जाल में फंसाते हैं और बाद में भारी ब्याज व मानसिक दबाव के जरिए उनका शोषण करते हैं।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “डिजिटल लोन ऐप्स अब केवल आर्थिक लेनदेन का माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि कई मामलों में यह साइकोलॉजिकल दबाव और ब्लैकमेल का जरिया बनते जा रहे हैं। अपराधी पहले छोटे लोन देकर भरोसा बनाते हैं और फिर डेटा का दुरुपयोग कर पीड़ित को मानसिक रूप से तोड़ देते हैं।”

फिलहाल, जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस तरह के ऐप्स के जरिए अन्य लोगों को भी निशाना बनाया गया है। साथ ही डिजिटल उपकरणों और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच के जरिए और सबूत जुटाए जा रहे हैं।

यह मामला एक चेतावनी के रूप में सामने आया है कि डिजिटल सुविधाओं के इस दौर में सतर्कता बेहद जरूरी है। आसान लोन के आकर्षण में आने से पहले उसकी शर्तों, वैधता और जोखिमों को समझना अब हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य हो गया है, ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

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