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झारखंड ट्रेजरी घोटाला: IAS कमेटी के हाथ में जांच, करोड़ों की अवैध निकासी की परतें खुलेंगी

Roopa
By Roopa
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रांची/झारखंड: झारखंड में कथित ट्रेजरी घोटाले और बोकारो एवं हजारीबाग स्थित एसपी कार्यालयों से जुड़े करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले ने अब बड़ा प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। राज्य सरकार ने इस पूरे प्रकरण की गहन जांच के लिए वित्त विभाग की एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति पूरे मामले की वित्तीय और प्रशासनिक परतों की विस्तृत जांच करेगी।

सूत्रों के अनुसार, इस जांच समिति की अध्यक्षता एक वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी करेंगे, जबकि तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच के लिए महालेखा नियंत्रक (AG) कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को भी इसमें शामिल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि मामले की संवेदनशीलता और वित्तीय दायरे को देखते हुए निष्पक्ष और बहुस्तरीय जांच बेहद जरूरी है।

जानकारी के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण में बीते कुछ वर्षों के दौरान पुलिसकर्मियों के वेतन और अन्य मदों से जुड़े ट्रेजरी लेन-देन की फाइलों में कई अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। शुरुआती स्तर पर हुई समीक्षा में यह संकेत मिला है कि दस्तावेजों के रखरखाव और भुगतान प्रक्रिया में गंभीर खामियां हो सकती हैं, जिनके चलते करोड़ों रुपये के कथित गलत भुगतान का मामला सामने आया है।

वित्त विभाग की ओर से तैयार प्रस्ताव में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि जांच समिति को सभी संबंधित दस्तावेजों, ट्रेजरी रिकॉर्ड और बैंकिंग ट्रांजैक्शन की गहन जांच का पूरा अधिकार होगा। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कहीं किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी तो नहीं की गई या फिर सिस्टम के भीतर कोई संगठित गड़बड़ी तो नहीं हुई।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार के स्तर पर यह भी विचार किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर इसकी जांच को आपराधिक जांच एजेंसी को भी सौंपा जा सकता है। हालांकि फिलहाल प्राथमिक जांच वित्त विभाग की समिति ही करेगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

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राजधानी रांची स्थित कोषागार से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी गई है। विशेष रूप से पिछले तीन वर्षों के वेतन भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित ट्रांजैक्शन पर फोकस किया जा रहा है। जांच एजेंसियों की नजर उन बिंदुओं पर है जहां भुगतान प्रक्रिया में असामान्य तेजी, डुप्लीकेट एंट्री या बिना अनुमोदन के निकासी जैसी स्थितियां सामने आ सकती हैं।

सूत्रों का कहना है कि समिति न केवल वित्तीय अनियमितताओं की जांच करेगी, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि सिस्टम में किस स्तर पर चूक हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि क्या यह मामला केवल तकनीकी गलती है या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका भी हो सकती है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस जांच को लेकर हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला और भी बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा सकता है।

सरकार की इस कार्रवाई को वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि IAS कमेटी की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या यह मामला किसी बड़े वित्तीय घोटाले का रूप लेता है या फिर यह प्रशासनिक चूक तक सीमित रहता है।

फिलहाल, राज्य प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होगी तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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