झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित सॉल्वर गैंग के खुलासे के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और आरोपियों पर कार्रवाई हुई है।

नौकरी के नाम पर करोड़ों का खेल: उत्पाद सिपाही परीक्षा में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़, ₹10 लाख में पास कराने का सौदा

Team The420
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रांची: झारखंड में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसने सरकारी नौकरियों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परीक्षा पास कराने के नाम पर सक्रिय सॉल्वर गैंग ने अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की वसूली कर संगठित तरीके से धांधली का जाल बिछाया था। मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिनसे इस पूरे नेटवर्क की गहराई का अंदाजा लगाया जा रहा है।

जांच में सामने आया कि सॉल्वर गैंग ने प्रत्येक अभ्यर्थी से परीक्षा पास कराने के लिए ₹10 लाख की डील तय की थी। इसके तहत पहले चरण में ₹3 लाख एडवांस के रूप में वसूले गए, जबकि शेष ₹7 लाख परीक्षा में सफलता के बाद लिए जाने थे। यह रकम सुनियोजित तरीके से एकत्र की जा रही थी, जिससे गिरोह के बड़े नेटवर्क और उसकी पेशेवर कार्यप्रणाली का संकेत मिलता है।

पूछताछ के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि अब तक 159 अभ्यर्थियों से ₹3-3 लाख के हिसाब से कुल ₹4.77 करोड़ की उगाही की जा चुकी थी। यह रकम नकद और अन्य माध्यमों से ली गई, ताकि लेन-देन का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड न रह सके। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है, क्योंकि कई अभ्यर्थियों के बारे में अभी जानकारी जुटाई जा रही है।

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कार्रवाई के तहत तमाड़ क्षेत्र से गिरफ्तार 164 आरोपियों समेत कुल 166 लोगों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इस मामले में अब तक 179 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है, जिससे यह साफ है कि यह कोई छोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक नेटवर्क था, जो लंबे समय से सक्रिय हो सकता है।

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने अभ्यर्थियों को एक स्थान पर इकट्ठा कर उन्हें प्रश्न पत्र के उत्तर रटवाने की योजना बनाई थी। इसके लिए तमाड़ के रणगांव से करीब सात किलोमीटर दूर एक अर्द्धनिर्मित नर्सिंग कॉलेज का इस्तेमाल किया गया। यहां अभ्यर्थियों को लाने-ले जाने के लिए विशेष तौर पर वाहनों की व्यवस्था की गई थी, ताकि गतिविधियां गोपनीय बनी रहें और बाहरी लोगों को भनक न लगे।

सूत्रों के मुताबिक, गिरोह के सदस्य अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाते थे कि उन्हें परीक्षा में पास करवा दिया जाएगा। इसके लिए वे कथित तौर पर सॉल्वर बैठाने, प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने या उत्तर याद करवाने जैसी तरकीबों का इस्तेमाल करने का दावा करते थे। हालांकि, इस पूरे नेटवर्क में किन-किन स्तरों पर लोगों की भूमिका रही, इसकी जांच अभी जारी है।

मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब प्रशासन को सूचना मिली कि कुछ संदिग्ध लोग अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले उत्तर रटवा रहे हैं। इसके बाद रविवार सुबह छापेमारी की गई, जिसमें गिरोह के पांच सदस्यों के साथ 159 अभ्यर्थियों को मौके से पकड़ा गया। इस दौरान कई डिजिटल उपकरण और अन्य साक्ष्य भी बरामद किए गए, जो जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, बाद में परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि प्रश्न पत्र के मिलान में केवल कुछ प्रश्न ही आंशिक रूप से मेल खाते पाए गए। इसके बावजूद, जिस तरह से बड़े पैमाने पर अभ्यर्थियों को इकट्ठा कर तैयारी कराई जा रही थी, उसने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि सरकारी नौकरियों के प्रति युवाओं की बढ़ती प्रतिस्पर्धा का फायदा उठाकर अपराधी किस तरह उन्हें अपने जाल में फंसा रहे हैं। आसान रास्ते का लालच देकर न केवल आर्थिक शोषण किया जा रहा है, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।

फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस गिरोह के तार अन्य राज्यों या परीक्षाओं से भी जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जो भर्ती प्रक्रियाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ सकते हैं।

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