अभिनेता जावेद जाफरी के परिवार से कथित ₹16.24 करोड़ की निवेश ठगी के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने एक और प्रमुख आरोपी को गिरफ्तार किया है। हालांकि, मामले में नामजद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के सहायक आयुक्त महेश पाटिल अब भी फरार हैं। उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया जा चुका है, लेकिन अब तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में गिरफ्तार किए गए आरोपी देवेंद्र पडवाल को सिंधुदुर्ग जिले के मालवन से पकड़ा गया। इससे पहले निशित पटेल और रूपेश मोरे को गिरफ्तार किया जा चुका है और दोनों न्यायिक हिरासत में हैं। जांच में आरोप है कि रूपेश मोरे ने कथित ठगी को अंजाम देने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे।
पुलिस के मुताबिक, महेश पाटिल के देश छोड़कर भागने की आशंका को देखते हुए लगभग दो सप्ताह पहले उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। विभिन्न टीमें उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं।
जांच में सामने आया है कि देवेंद्र पडवाल मुंबई के खार इलाके में उसी इमारत में रहता था, जहां सह-आरोपी निशित पटेल का निवास है। आरोप है कि पडवाल ने एक प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर के नाम पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार की और स्वयं को उस डेवलपर की ओर से कानूनी दस्तावेजों पर निर्णय लेने और हस्ताक्षर करने का अधिकृत प्रतिनिधि बताकर निवेशकों का विश्वास हासिल किया।
गिरफ्तारी के बाद पडवाल को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे आगे की पूछताछ के लिए सोमवार तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
यह मामला अभिनेता जावेद जाफरी की पत्नी हबीबा जाफरी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। प्रारंभिक प्राथमिकी मई में खार पुलिस थाने में दर्ज हुई थी, जिसे बाद में मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल को सौंप दिया गया। प्राथमिकी में महेश पाटिल, निशित पटेल, देवेंद्र पडवाल, रूपेश मोरे तथा अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।
शिकायत के अनुसार, हबीबा जाफरी की मुलाकात महेश पाटिल से बीएमसी कार्यालय आने-जाने के दौरान हुई थी। आरोप है कि पाटिल ने उन्हें बांद्रा स्थित एक पुनर्विकास परियोजना में निवेश का आकर्षक प्रस्ताव दिया और निवेश के लिए निशित पटेल के माध्यम से धन लगाने की सलाह दी।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि आरोपियों ने सरकारी पंजीकरण से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें वास्तविक बताकर हबीबा जाफरी, उनके पति जावेद जाफरी, रिश्तेदार नवेद जाफरी और अन्य निवेशकों को परियोजना में निवेश के लिए राजी किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने निवेशकों से चेक, नकद, विदेशी मुद्रा और लग्जरी घड़ियों के रूप में कुल लगभग ₹16.24 करोड़ प्राप्त किए और बाद में कथित रूप से धोखाधड़ी कर दी।
जब हबीबा जाफरी को कथित ठगी का संदेह हुआ तो उन्होंने खार पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान प्रकरण को आगे की कार्रवाई के लिए क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल को स्थानांतरित कर दिया गया। मामले में फरार आरोपियों की तलाश और वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है।
