पूर्व मंत्री आजम खां और उनके परिजनों से जुड़े जौहर ट्रस्ट पर आयकर विभाग की कार्रवाई तेज हो गई है। विभाग ने ट्रस्ट को कारण बताओ नोटिस जारी कर कई गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक मुद्दों पर जवाब मांगा है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई ट्रस्ट को प्रदान की गई आयकर छूट और उससे संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच के क्रम में की गई है। नोटिस में निर्धारित तिथि पर ट्रस्ट को अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। यदि विभाग को जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो ट्रस्ट का पंजीकरण और आयकर छूट से संबंधित प्रमाणपत्र निरस्त किए जाने की कार्रवाई की जा सकती है।
प्रधान आयकर आयुक्त (केंद्रीय) की ओर से जारी नोटिस में ट्रस्ट की गतिविधियों, वित्तीय लेनदेन, भूमि उपयोग, निर्माण कार्यों और दान से जुड़े मामलों पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग ने विभिन्न न्यायालयों के आदेशों और जांच में सामने आए तथ्यों का हवाला देते हुए कई बिंदुओं पर जवाब तलब किया है। इनमें विश्वविद्यालय परिसर के भीतर विभिन्न निर्माण कार्य, भूमि उपयोग में कथित अनियमितताएं, भवन निर्माण की वास्तविक लागत और दान के स्रोत प्रमुख रूप से शामिल हैं।
आयकर विभाग के अनुसार, जांच के दौरान ऐसे कई तथ्य सामने आए हैं जिन पर ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट और संतोषजनक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। नोटिस में विश्वविद्यालय परिसर में मस्जिद और राजनीतिक दल के कार्यालय भवन के निर्माण, निर्धारित सीमा से अधिक भूमि पर कथित कब्जे तथा विभिन्न निर्माण गतिविधियों से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। विभाग ने यह भी पूछा है कि संबंधित निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक अनुमतियां और वैधानिक स्वीकृतियां किस आधार पर प्राप्त की गई थीं।
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़ा है। विभाग का दावा है कि वर्ष 2020-21 से 2023-24 के बीच ट्रस्ट द्वारा आयकर विवरणियों में घोषित आय और बैंक खातों में जमा राशि के बीच बड़ा अंतर पाया गया है। जांच में सामने आया कि वर्ष 2020-21 में ट्रस्ट ने लगभग ₹12.83 करोड़ की आय घोषित की, जबकि बैंक खातों में करीब ₹27.39 करोड़ जमा हुए। इसी प्रकार वर्ष 2021-22 में लगभग ₹8.31 करोड़ की आय दिखाई गई, जबकि बैंक खातों में करीब ₹25.04 करोड़ जमा होने की जानकारी मिली। बाद के वर्षों में भी इसी प्रकार के अंतर की जांच की जा रही है।
दान के माध्यम से प्राप्त धनराशि भी विभाग की जांच के केंद्र में है। नोटिस में कहा गया है कि कई दानदाताओं की पहचान और उनके वित्तीय विवरणों का पर्याप्त सत्यापन नहीं हो पाया। जांच के दौरान कुछ ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें कथित दानदाताओं का पता लगाने में कठिनाई हुई। विभाग को संदेह है कि दान के रूप में दिखाई गई कुछ रकम के स्रोत स्पष्ट नहीं हैं। इसी आधार पर ट्रस्ट से दान की प्रकृति, स्रोत और संबंधित दस्तावेजों का विवरण मांगा गया है।
जांच में ट्रस्ट द्वारा कराए गए निर्माण कार्यों की लागत को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विभागीय स्तर पर कराए गए मूल्यांकन में विश्वविद्यालय परिसर के 59 भवनों पर अनुमानित व्यय लगभग ₹494 करोड़ बताया गया है, जबकि ट्रस्ट की ओर से इन निर्माण कार्यों पर केवल ₹46 करोड़ खर्च होने का दावा किया गया था। दोनों आंकड़ों के बीच बड़े अंतर को देखते हुए विभाग ने निर्माण लागत से जुड़े सभी दस्तावेज और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा है।
इसके अतिरिक्त जांच में कुछ ठेकेदारों के बयानों का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि सरकारी योजनाओं के लिए स्वीकृत धनराशि का उपयोग विश्वविद्यालय परिसर में निर्माण और अन्य कार्यों के लिए किया गया। साथ ही भवन निर्माण के लिए आवश्यक स्वीकृतियों और अग्निशमन सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर भी सवाल उठाए गए हैं।
फिलहाल जौहर ट्रस्ट को जारी नोटिस के बाद मामला महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। अब विभाग ट्रस्ट के जवाब और उपलब्ध कराए जाने वाले दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो ट्रस्ट की आयकर छूट और पंजीकरण की स्थिति पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
