दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह झारखंड के जामताड़ा, देवघर और दिल्ली-एनसीआर से संचालित हो रहा था। जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को बैंक अधिकारी, बीएसईएस कर्मचारी या अन्य सरकारी एजेंसियों का प्रतिनिधि बताकर लोगों को फर्जी APK फाइल भेजते थे। फाइल इंस्टॉल होते ही पीड़ितों के मोबाइल फोन हैक हो जाते थे, जिसके बाद इंटरनेट बैंकिंग, ओटीपी और अन्य संवेदनशील जानकारियां हासिल कर खातों से रकम निकाल ली जाती थी। पुलिस ने इस कार्रवाई में 14 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, डिजिटल साक्ष्य और ठगी की रकम से खरीदी गई एक महिंद्रा थार रॉक्स कार बरामद की है।
पुलिस के अनुसार गिरोह से जुड़े चार साइबर ठगी के मामलों का खुलासा हुआ है, जिनमें कुल ₹26 लाख से अधिक की धोखाधड़ी की गई। जांच के दौरान साइबर सेल को चारों मामलों में एक जैसी कार्यप्रणाली दिखाई दी, जिसके बाद तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के तार झारखंड के जामताड़ा और देवघर से जुड़े मिले। इसके बाद विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पहले मामले में एक वरिष्ठ नागरिक को सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने का झांसा देकर ₹18.50 लाख की ठगी की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने झारखंड के जामताड़ा और देवघर से मुख्य आरोपी मंजूर आलम समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार अन्य आरोपियों में बुलंदशहर निवासी यूसुफ तथा मेरठ निवासी आर्यन, राम प्रकाश, मनोहर और प्रियदर्शन शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से महिंद्रा थार रॉक्स कार, छह मोबाइल फोन और कई डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
दूसरे मामले में क्रेडिट कार्ड की केवाईसी अपडेट कराने के नाम पर एक व्यक्ति से ₹1.01 लाख की ठगी की गई। इस मामले में देवघर निवासी रविंद्र कुमार मंडल को हजारीबाग से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से तीन मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद हुआ, जिनकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।
तीसरे मामले में पीड़ित को एम-परिवहन चालान के नाम पर फर्जी APK फाइल भेजी गई। फाइल इंस्टॉल करने के बाद उसका मोबाइल हैक कर लिया गया और उसके बैंक खाते से ₹1.09 लाख निकाल लिए गए। इस मामले में पुलिस ने देवघर से राम विजय कुमार दास को गिरफ्तार किया तथा उसके कब्जे से तीन मोबाइल फोन बरामद किए।
चौथे मामले में आरोपियों ने खुद को बीएसईएस अधिकारी बताकर एक व्यक्ति से ₹6.31 लाख की ठगी की। पुलिस ने इस मामले में हजारीबाग निवासी अंकित कुमार और गिरिडीह निवासी गोलू कुमार को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि अंकित ने अपना क्रेडिट कार्ड गोलू को उपलब्ध कराया था, जिसका इस्तेमाल ठगी की रकम को विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर छिपाने के लिए किया जाता था। दोनों आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए।
एल्गोरिथा सिक्योरिटी के एक रिसर्चर ने कहा कि APK फाइल आधारित साइबर हमले तेजी से बढ़ रहे हैं क्योंकि इनके जरिए अपराधी सीधे मोबाइल डिवाइस पर नियंत्रण हासिल करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी अनजान लिंक या APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें और केवल आधिकारिक ऐप स्टोर से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करें।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि जामताड़ा जैसे साइबर अपराध नेटवर्क लगातार सोशल इंजीनियरिंग और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर लोगों को झांसे में लेते हैं। उन्होंने कहा कि बैंक, बिजली कंपनी, सरकारी विभाग या किसी अन्य संस्था के नाम पर आने वाले कॉल, लिंक या APK फाइल पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी भी अनुरोध की पुष्टि संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से करने के बाद ही कोई कार्रवाई करें। उनके अनुसार थोड़ी सी सतर्कता साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों, वित्तीय नेटवर्क तथा विभिन्न राज्यों में फैले संभावित साइबर ठगी मॉड्यूल की जांच की जा रही है। साथ ही बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
