राजस्थान की राजधानी जयपुर में करोड़ों रुपये के कथित बैंक ऋण घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एक निजी बैंक का तत्कालीन मैनेजर मदनलाल कट्टा, अजय शर्मा और उसकी पत्नी सपना शर्मा शामिल हैं। तीनों पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विवादित और संदिग्ध संपत्तियों को गिरवी रखकर करोड़ों रुपये के ऋण स्वीकृत करवाने तथा बैंक को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
यह मामला वर्ष 2018 में दर्ज उस बहुचर्चित घोटाले से जुड़ा है जिसमें बैंक के तत्कालीन पदाधिकारियों, कर्मचारियों, ऋण लेने वालों और गारंटरों सहित कुल 59 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए गए थे। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी संपत्ति दस्तावेज तैयार किए और उन्हें वास्तविक बताते हुए बैंक में प्रस्तुत किया। इन दस्तावेजों के आधार पर कई ऋण खातों को स्वीकृति दिलाई गई, जिसके बाद करोड़ों रुपये की राशि निकाल ली गई।
जांच में सामने आया कि ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया के दौरान बैंकिंग नियमों और सत्यापन प्रक्रियाओं की कथित तौर पर अनदेखी की गई। आरोप है कि कुछ संपत्तियां विवादित थीं, जबकि कुछ के दस्तावेज पूरी तरह फर्जी थे। इसके बावजूद उन्हें बैंक के समक्ष वैध संपत्ति के रूप में पेश कर मॉर्गेज लोन हासिल किए गए। बाद में ऋण राशि की वसूली नहीं हो सकी और मामला बड़े वित्तीय घोटाले के रूप में सामने आया।
सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण में सहकारिता विभाग द्वारा की गई जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई थीं। जांच रिपोर्ट में बैंक के भीतर प्रक्रियागत खामियों और दस्तावेज सत्यापन में कथित लापरवाही की ओर भी संकेत किया गया। इसके बाद संबंधित मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया और विस्तृत जांच शुरू की गई।
मामले की जांच के दौरान कई आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, लेकिन कुछ प्रमुख आरोपी वर्षों से फरार चल रहे थे। पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया और उन पर ₹10-10 हजार का इनाम भी घोषित किया गया था। जांच टीम ने तकनीकी निगरानी, मोबाइल लोकेशन विश्लेषण और अन्य सूचनाओं के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी।
हाल के दिनों में पुलिस को आरोपियों के संभावित ठिकानों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके बाद विशेष टीम ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए मदनलाल कट्टा, अजय शर्मा और सपना शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद तीनों से पूछताछ की जा रही है और जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि कथित घोटाले में और किन लोगों की भूमिका रही तथा ऋण राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया।
जांच एजेंसियों का मानना है कि मामले की परतें खुलने के साथ वित्तीय लेन-देन और संपत्ति दस्तावेजों से जुड़े कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं। अधिकारियों को संदेह है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने और ऋण स्वीकृति दिलाने के लिए एक संगठित नेटवर्क ने काम किया हो सकता है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए पुराने रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की दोबारा जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र में दस्तावेज सत्यापन और जोखिम मूल्यांकन की प्रक्रियाओं को मजबूत बनाना ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए बेहद आवश्यक है। वित्तीय संस्थानों को डिजिटल सत्यापन, भूमि अभिलेखों के क्रॉस-चेक और स्वतंत्र मूल्यांकन जैसी व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है ताकि फर्जी संपत्तियों के आधार पर ऋण स्वीकृत कराने वाले गिरोहों पर समय रहते अंकुश लगाया जा सके।
फिलहाल तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी को जांच में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। मामले में आगे की पूछताछ और दस्तावेजी जांच के आधार पर अन्य संदिग्धों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
