अमेरिका-इजरायल सैन्य अभियान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण ईरान में इंटरनेट सेवाएं व्यापक रूप से बंद कर दी गई हैं। सरकारी स्तर पर लगाए गए इस डिजिटल ब्लैकआउट के चलते देश के अंदर और बाहर संचार लगभग ठप हो गया है, जिससे नागरिकों की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, ईरानी प्रशासन ने युद्ध की शुरुआत के बाद संचार नेटवर्क पर प्रतिबंध लागू किया था। 28 फरवरी से शुरू हुए सैन्य अभियान के बाद राजधानी Tehran सहित कई क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच सीमित कर दी गई है। नेटवर्क मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स के मुताबिक, इंटरनेट कनेक्टिविटी सामान्य स्तर के लगभग 1 प्रतिशत पर आकर स्थिर हो गई है और यह स्थिति 120 घंटे से अधिक समय से बनी हुई है।
डिजिटल ब्लैकआउट के कारण आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर गंभीर असर पड़ा है। जीपीएस नेविगेशन, ऑनलाइन सूचना सेवाएं और आपातकालीन संचार तक पहुंच मुश्किल हो गई है। स्थानीय स्तर पर केवल सीमित सरकारी इंट्रानेट नेटवर्क को ही चालू रखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध नागरिक सुरक्षा और सूचना नियंत्रण दोनों उद्देश्य से लगाया गया हो सकता है। युद्ध की स्थिति में सरकारें अक्सर संचार माध्यमों को सीमित करती हैं ताकि सैन्य गतिविधियों और रणनीतिक सूचनाओं का प्रसार रोका जा सके।
ईरान से बाहर रहने वाले प्रवासी नागरिकों में भी चिंता बढ़ गई है। जर्मनी में रहने वाली एक ईरानी मूल की महिला ने कहा कि वह रोज सुबह अपने परिवार की कुशलता की जानकारी लेने के लिए खबरें देखने की कोशिश करती है, लेकिन संपर्क न होने से मानसिक तनाव बढ़ गया है।
कुछ नागरिक प्रतिबंध से बचने के लिए वीपीएन और अन्य अवैध डिजिटल टूल का उपयोग कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार समर्थक नेटवर्क से जुड़े करीब 50,000 विशेष सिम कार्ड भी सक्रिय हैं, जिनके उपयोगकर्ताओं को सोशल मीडिया और ऑनलाइन संचार की विशेष सुविधा दी गई है।
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अधिकारियों ने विदेशी उपग्रह इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के उपयोग को भी हतोत्साहित किया है। कुछ नागरिक कथित तौर पर एलन मस्क की स्टारलिंक जैसी सेवाओं का उपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि सरकार इसे सुरक्षा जोखिम मानकर प्रतिबंधित कर रही है।
संचार विशेषज्ञों का कहना है कि सूचना ब्लैकआउट के दौरान गलत सूचनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में सरकारी समर्थक और अन्य समूह सोशल मीडिया खाली स्थान का उपयोग अपनी विचारधारा फैलाने के लिए कर सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि पारदर्शी सूचना प्रवाह की कमी संघर्ष क्षेत्रों में मानव सुरक्षा जोखिम बढ़ा सकती है।
सैन्य तनाव के बीच Israel Defense Forces द्वारा संभावित हमलों की चेतावनी भी जारी की जाती रही है, लेकिन इंटरनेट बंद होने से कई नागरिकों तक ये सूचनाएं समय पर नहीं पहुंच पा रही हैं। इससे हवाई हमलों के दौरान नागरिक निकासी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
ईरानी समाज विज्ञान विशेषज्ञों का कहना है कि संचार प्रतिबंध केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि सामाजिक संकट भी पैदा करता है। लंबे समय तक ब्लैकआउट रहने पर विरोध प्रदर्शन संगठित करना भी मुश्किल हो जाता है और अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक जानकारी पहुंचने में बाधा आती है।
वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इंटरनेट सेवाएं बहाल करना जरूरी है ताकि नागरिकों को सुरक्षा संबंधी चेतावनियां समय पर मिल सकें और मानवीय सहायता कार्य प्रभावित न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में सूचना नियंत्रण भी एक रणनीतिक हथियार बन गया है।
फिलहाल संघर्ष की स्थिति और डिजिटल प्रतिबंध को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगरानी जारी है। विश्लेषकों का कहना है कि युद्ध लंबा खिंचने पर संचार संकट और गहरा सकता है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है।
