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‘डिजिटल कोहरे’ में घिरा ईरान, साइबर हमलों से ठप हुई संचार व्यवस्था

Team The420
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान इन दिनों केवल सैन्य हमलों का ही नहीं, बल्कि व्यापक साइबर हमलों का भी सामना कर रहा है। अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू की गई सैन्य कार्रवाई के समानांतर साइबर हमलों की ऐसी श्रृंखला चली कि पूरा देश तथाकथित ‘डिजिटल कोहरे’ में घिर गया। हालात यह हैं कि पिछले 72 घंटे से अधिक समय से देश में इंटरनेट सेवाएं या तो पूरी तरह ठप हैं या बेहद धीमी गति से संचालित हो रही हैं।

सूत्रों के अनुसार 28 फरवरी से शुरू हुए सैन्य हमलों के साथ ही ईरान के सरकारी नेटवर्क, प्रमुख वेबसाइटों और आम नागरिकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले मोबाइल ऐप्स को निशाना बनाया गया। सरकारी सर्वरों पर दबाव, डेटा सेंटरों पर साइबर हमले और संचार तंत्र में व्यवधान के कारण डिजिटल ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

धार्मिक ऐप भी बना निशाना

साइबर हमलों के दौरान ईरान के सबसे लोकप्रिय धार्मिक कैलेंडर ऐप ‘बड़े सबा’ को भी हैक कर लिया गया। यह ऐप देश में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है और इसके 50 लाख से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ता बताए जाते हैं। कहा जाता है कि सरकार समर्थक समूहों, प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े लोग भी इसका इस्तेमाल करते हैं।

हैकिंग के बाद ऐप पर असामान्य संदेश दिखाई देने लगे। उपयोगकर्ताओं को ऐसे नोटिफिकेशन प्राप्त हुए जिनमें ‘अब हिसाब-किताब का समय है’ और ‘हथियार छोड़ दें’ जैसे वाक्य दर्ज थे। इन संदेशों ने न केवल आम नागरिकों बल्कि सरकारी हलकों में भी चिंता बढ़ा दी। कुछ समय के लिए ऐप की सेवाएं पूरी तरह बाधित रहीं, बाद में इसे आंशिक रूप से बहाल किया गया।

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क्या है ‘डिजिटल कोहरा’

विशेषज्ञ ‘डिजिटल कोहरा’ शब्द का उपयोग उस स्थिति के लिए करते हैं जब किसी देश की डिजिटल संचार व्यवस्था को इस तरह बाधित कर दिया जाता है कि उपयोगकर्ता सामान्य रूप से इंटरनेट का उपयोग नहीं कर पाते। जैसे घने कोहरे में दृश्यता लगभग समाप्त हो जाती है, वैसे ही साइबर हमलों के दौरान सूचना प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है।

इस स्थिति में वेबसाइटें खुलना बंद कर देती हैं, मैसेजिंग सेवाएं काम नहीं करतीं, बैंकिंग लेन-देन प्रभावित होता है और सरकारी पोर्टल ठप पड़ जाते हैं। कई बार इंटरनेट पूरी तरह बंद कर दिया जाता है या उसकी गति इतनी कम कर दी जाती है कि वह व्यावहारिक रूप से अनुपयोगी हो जाता है।

सैन्य और साइबर मोर्चा साथ-साथ

रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों में जमीनी मिसाइलों और हवाई बमबारी के साथ डिजिटल हमलों को भी रणनीतिक रूप से जोड़ा गया। इसका उद्देश्य केवल सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना नहीं, बल्कि संचार और सूचना नेटवर्क को भी निष्क्रिय करना बताया जा रहा है।

सरकारी सूत्रों ने माना है कि कई महत्वपूर्ण साइबर संसाधन अस्थायी रूप से प्रभावित हुए हैं। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर इंटरनेट बंदी को ‘तकनीकी समस्या’ बताया गया है। स्वतंत्र साइबर विश्लेषकों का कहना है कि नेटवर्क ट्रैफिक में असामान्य गिरावट और बाहरी हमलों के संकेत स्पष्ट रूप से देखे गए हैं।

आम नागरिकों पर असर

लगातार इंटरनेट बाधित रहने से आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऑनलाइन भुगतान, ई-कॉमर्स, शिक्षा और संचार सेवाएं प्रभावित हैं। कई शहरों में लोग आवश्यक सूचनाओं के लिए पारंपरिक माध्यमों पर निर्भर हो गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध अब केवल सीमा पर नहीं लड़े जाते, बल्कि डिजिटल क्षेत्र भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। साइबर हमलों के माध्यम से किसी देश की आंतरिक व्यवस्था को अस्थिर करना अपेक्षाकृत कम लागत और उच्च प्रभाव वाला तरीका माना जाता है।

फिलहाल ईरान में इंटरनेट सेवाओं की पूर्ण बहाली को लेकर स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है। हालात सामान्य होने तक देश ‘डिजिटल कोहरे’ की इसी स्थिति से जूझता नजर आ रहा है।

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