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“हर सेकंड साइबर अपराध का शिकार भारत: 2025 में हेल्पलाइन पर 3.24 करोड़ शिकायतें, खतरे की घंटी तेज”

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By Roopa
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नई दिल्ली। देश में तेजी से फैल रहे साइबर अपराध अब एक गंभीर राष्ट्रीय चुनौती का रूप लेते जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि औसतन हर सेकंड एक भारतीय साइबर ठगी या डिजिटल अपराध का शिकार हो रहा है। इसका सबसे बड़ा संकेत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज होने वाली शिकायतों के आंकड़ों से मिलता है, जिसने वर्ष 2025 में नया रिकॉर्ड कायम कर दिया।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में इस हेल्पलाइन पर कुल 3.24 करोड़ शिकायतें दर्ज की गईं। यह संख्या न केवल पिछले वर्षों के मुकाबले काफी अधिक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि देश में साइबर अपराध किस तेजी से फैल रहा है। वर्ष 2023 में जहां 96.4 लाख शिकायतें दर्ज हुई थीं, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 2.21 करोड़ हो गया था। इसके बाद 2025 में यह संख्या 3.24 करोड़ तक पहुंच गई।

हालांकि, वृद्धि दर 2024 के 130 प्रतिशत से घटकर 2025 में 46.4 प्रतिशत रह गई है, लेकिन कुल शिकायतों की संख्या में लगातार वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है। अगर दैनिक औसत की बात करें, तो 2023 में जहां हर दिन करीब 26,411 कॉल्स दर्ज होती थीं, वहीं 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 88,976 कॉल्स प्रतिदिन हो गया। यानी दो वर्षों में शिकायतों की संख्या तीन गुना से भी अधिक बढ़ चुकी है।

यह हेल्पलाइन केंद्र सरकार की निगरानी में संचालित होती है और राज्य स्तर पर पुलिस तंत्र इसके संचालन में भूमिका निभाता है। शुरुआती स्तर पर यह हेल्पलाइन खासतौर पर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए बनाई गई थी, लेकिन अब यह साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शिकायतों में इस तेज उछाल के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, साइबर अपराधों में लगातार वृद्धि, और दूसरा, लोगों में बढ़ती जागरूकता। अब लोग ठगी का शिकार होने के बाद तुरंत शिकायत दर्ज कराने लगे हैं, जिससे आंकड़ों में तेजी से वृद्धि देखने को मिल रही है।

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ऑनलाइन फ्रॉड के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। फिशिंग स्कैम, फर्जी लोन कॉल, निवेश के नाम पर ठगी, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग और पहचान की चोरी जैसे अपराध तेजी से बढ़े हैं। साइबर अपराधी अब सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।

इस पूरे परिदृश्य पर प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh का कहना है, “आज साइबर अपराध पूरी तरह मनोवैज्ञानिक रणनीतियों पर आधारित हो गया है। अपराधी पहले व्यक्ति का विश्वास जीतते हैं, फिर उसे लालच या डर के जरिए निर्णय लेने के लिए मजबूर करते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऐसे अपराधों का दायरा और भी व्यापक हो गया है।”

उन्होंने आगे कहा कि समय पर शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी है, क्योंकि शुरुआती घंटों में ही कार्रवाई होने पर ठगी गई रकम को फ्रीज कराना संभव हो सकता है। “1930 हेल्पलाइन एक प्रभावी ‘फर्स्ट रिस्पॉन्स सिस्टम’ के रूप में काम कर रही है, लेकिन इसके साथ लोगों की सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है,” उन्होंने जोड़ा।

अधिकारियों के अनुसार, इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ साइबर अपराधी भी नए-नए तरीके अपना रहे हैं। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी का फायदा उठाकर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने लोगों को कुछ बुनियादी सावधानियां बरतने की सलाह दी है—जैसे किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा न करना, बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी साझा न करना, सोशल मीडिया पर संदिग्ध लिंक से बचना और कम समय में अधिक मुनाफे के लालच में न आना।

यह आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि साइबर अपराध अब केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक और आर्थिक खतरे के रूप में उभर चुका है। ऐसे में जहां सरकार और एजेंसियों को तकनीकी स्तर पर और मजबूत होना होगा, वहीं आम नागरिकों को भी डिजिटल दुनिया में सतर्क और जागरूक रहना बेहद जरूरी है।

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