गुरुग्राम साइबर पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक आईआईटी छात्र भी शामिल है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह विदेश में बैठे साइबर ठगों के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने और ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर करने का काम करता था। आरोपियों को राजस्थान के जयपुर से छापेमारी कर पकड़ा गया।
बैंक खाते बेचने का धंधा: 30% कमीशन, USDT क्रिप्टो में विदेश भेजावट
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी साइबर अपराधियों के लिए बैंक खाते खरीदते थे और इन खातों का संचालन भी करते थे। इसके बदले उन्हें ठगी की रकम का करीब 30 प्रतिशत कमीशन मिलता था। बाकी राशि को क्रिप्टोकरेंसी यूएसडीटी के जरिए विदेशी साइबर नेटवर्क तक भेज दिया जाता था। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए नए खातों की व्यवस्था की जाती थी।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जयपुर निवासी सौरभ कुमार मीना (27), फालोदी निवासी अभिषेक बिश्नोई (20) और नागौर निवासी लक्ष्मण उर्फ लक्की (22) के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक सौरभ कुमार मीना राजस्थान के आईआईटी जोधपुर का छात्र है, जबकि अभिषेक बिश्नोई नर्सिंग की पढ़ाई कर चुका है और लक्ष्मण उर्फ लक्की एमए डिग्री धारक बताया गया है।
टेलीग्राम टास्क ठगी का शिकार: ₹3.13 लाख लॉस से शुरू हुई जांच
साइबर पुलिस पश्चिमी क्षेत्र में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे टेलीग्राम एप के माध्यम से संपर्क कर ऑनलाइन टास्क पूरा करने के नाम पर ठगा गया। शिकायतकर्ता के अनुसार आरोपी ने विभिन्न कार्य दिलाने का झांसा देकर लगभग ₹3.13 लाख की धोखाधड़ी की। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तकनीकी सुरागों के आधार पर तीनों आरोपियों तक पहुंच गई।
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11 फोन, 40 सिम, 43 ATM जब्त: सौरभ मीना से रिमांड, नेटवर्क जांच
जांच में यह भी पता चला कि आरोपी साइबर ठगों के लिए बैंक खाते जुटाने का काम करते थे। ये लोग कमिशन के लालच में अपने और अन्य व्यक्तियों के नाम पर खाते खुलवाते थे और फिर उन्हें विदेशी गिरोह को सौंप देते थे। पुलिस ने इनके कब्जे से 11 मोबाइल फोन, 40 सिम कार्ड, 43 एटीएम कार्ड, 15 बैंक पासबुक और 7 चेकबुक बरामद किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये उपकरण ठगी के लेनदेन और नेटवर्क संचालन में इस्तेमाल किए जाते थे।
गुरुग्राम पुलिस के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे विदेश में सक्रिय साइबर ठगों के संपर्क में थे। ठगी की रकम आने के बाद उसे विभिन्न माध्यमों से क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर आगे भेजा जाता था, जिससे धन के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो सके। मामले में दो आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि मुख्य आरोपी सौरभ कुमार मीना से दो दिन की पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ जारी है।
साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के मामलों में स्थानीय स्तर पर सहयोगी नेटवर्क सबसे बड़ी चुनौती बन रहा है। पुलिस अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे ऑनलाइन टास्क, निवेश योजनाओं या संदिग्ध लिंक के माध्यम से पैसे भेजने से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर दें।
फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान और विदेश में बैठे मुख्य संचालकों तक पहुंचने के लिए जांच आगे बढ़ा रही है। मामले की विस्तृत पड़ताल जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
