अमेरिकी सरकार का आरोप—हायरिंग और प्रमोशन में नस्ल व जेंडर को बनाया आधार; सेटलमेंट के तहत कंपनी ने भुगतान पर सहमति जताई

“कॉर्पोरेट दुनिया में बड़ा झटका”: DEI पॉलिसी पर फंसी IBM, $17 मिलियन का सेटलमेंट

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By Roopa
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वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क: वैश्विक टेक सेक्टर में हलचल मचाने वाले एक बड़े घटनाक्रम में टेक दिग्गज IBM को कर्मचारी भेदभाव से जुड़े आरोपों के चलते $17 मिलियन (करीब ₹140 करोड़ से अधिक) का भुगतान करना पड़ा है। यह कार्रवाई अमेरिकी सरकार की सिविल राइट्स फ्रॉड इनिशिएटिव के तहत हुई एक अहम सेटलमेंट के रूप में सामने आई है, जिसमें कंपनी पर अपने फेडरल कॉन्ट्रैक्ट्स में एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियमों का पालन न करने का आरोप लगाया गया।

मामले के अनुसार, कंपनी पर आरोप है कि उसने भर्ती, प्रमोशन और अन्य रोजगार से जुड़े फैसलों में नस्ल, रंग, राष्ट्रीयता और जेंडर जैसे कारकों को ध्यान में रखा। अमेरिकी कानून के तहत फेडरल कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे कर्मचारियों और आवेदकों को समान अवसर प्रदान करें और किसी भी प्रकार का भेदभाव न करें। लेकिन जांच में सामने आया कि कंपनी की कुछ नीतियां इन नियमों के अनुरूप नहीं थीं।

सरकार के आरोपों में कहा गया कि IBM ने “डायवर्सिटी मॉडिफायर” नामक एक सिस्टम का इस्तेमाल किया, जिसके जरिए कर्मचारियों के बोनस को डेमोग्राफिक लक्ष्यों से जोड़ा गया। इसके अलावा, इंटरव्यू प्रक्रिया में भी बदलाव किए गए, जहां “डाइवर्स इंटरव्यू स्लेट्स” के जरिए उम्मीदवारों के चयन में नस्ल और जेंडर को प्राथमिकता दी गई।

इतना ही नहीं, कंपनी पर यह भी आरोप लगा कि उसने कुछ ट्रेनिंग प्रोग्राम, मेंटरशिप, लीडरशिप डेवलपमेंट और शैक्षणिक अवसरों को सीमित समूहों तक ही रखा। इन प्रोग्राम्स में भागीदारी और पात्रता को नस्ल या जेंडर के आधार पर तय किया गया, जिसे अमेरिकी सरकार ने भेदभावपूर्ण करार दिया।

अमेरिकी प्रशासन ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि “डायवर्सिटी, इक्विटी और इंक्लूजन (DEI)” के नाम पर भेदभाव को वैध नहीं ठहराया जा सकता। अधिकारियों के अनुसार, कोई भी कंपनी सरकारी अनुबंधों के तहत काम करते हुए कानून से बचने के लिए ऐसी नीतियां लागू नहीं कर सकती, जो समान अवसर के सिद्धांत के खिलाफ हों।

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हालांकि, सेटलमेंट के तहत कंपनी ने इन आरोपों को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है, लेकिन उसने मामले को समाप्त करने और जांच में सहयोग के तहत $17,077,043 का भुगतान करने पर सहमति जताई। जांच के दौरान कंपनी ने कई अहम जानकारियां साझा कीं, जिससे नुकसान और जुर्माने की गणना में सहायता मिली।

सरकार ने यह भी माना कि कंपनी ने जांच के दौरान सहयोग किया और कुछ विवादित नीतियों में सुधार के लिए स्वैच्छिक कदम उठाए। इनमें कई प्रोग्राम्स को समाप्त करना या उनमें बदलाव करना शामिल है, ताकि भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। खासकर उन कंपनियों के लिए, जो सरकारी अनुबंधों के तहत काम करती हैं, उनके लिए एंटी-डिस्क्रिमिनेशन नियमों का सख्ती से पालन करना बेहद जरूरी है। किसी भी नीति या प्रक्रिया, जो सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से भेदभाव को बढ़ावा देती है, गंभीर कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है।

इस घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर DEI नीतियों को लेकर एक नई बहस भी छेड़ दी है। जहां एक ओर कंपनियां विविधता और समावेशन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर यह सवाल उठ रहा है कि कहीं ये प्रयास अनजाने में भेदभाव का रूप तो नहीं ले रहे।

डिजिटल और कॉर्पोरेट युग में यह मामला एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है, जो यह स्पष्ट करता है कि मेरिट आधारित प्रणाली और समान अवसर से किसी भी तरह का समझौता अब कानूनी जोखिम में बदल सकता है।

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