हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक हाई-प्रोफाइल ज्वेलरी डील से जुड़ा चौंकाने वाला धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जिसमें एक कारोबारी से ₹50.8 करोड़ की ठगी किए जाने का आरोप लगा है। आरोप है कि सरकारी कस्टडी में रखे ज्वेलरी बॉक्स को रिलीज कराने और उसमें हिस्सेदारी दिलाने का लालच देकर यह रकम हासिल की गई। इस मामले में दो लोगों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
शिकायतकर्ता राजेश अग्रवाल के अनुसार, वर्ष 2016 में मोहम्मद जाकिर उस्मान और सुकेश गुप्ता ने उनसे संपर्क किया था। दोनों ने दावा किया कि वे सरकारी अभिरक्षा में रखे पांच ज्वेलरी बॉक्स को छुड़ाने की प्रक्रिया में लगे हुए हैं और इसके लिए वित्तीय सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे ही ज्वेलरी रिलीज होगी, उसमें उन्हें उचित हिस्सेदारी दी जाएगी।
इन आश्वासनों पर भरोसा करते हुए राजेश अग्रवाल ने 3 अक्टूबर 2016 को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत उन्होंने केवल ज्वेलरी रिलीज प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई। इसके बाद जून 2016 से फरवरी 2018 के बीच उन्होंने कथित तौर पर ₹50.8 करोड़ की राशि विभिन्न कंपनियों—आशी रियल्टर्स, एमबीएस ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड और एमबीएस इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड—को ट्रांसफर की। बताया जा रहा है कि ये सभी संस्थाएं सुकेश गुप्ता के नियंत्रण में थीं।
शिकायत में कहा गया है कि भारी निवेश और प्रयासों के बाद तेलंगाना सरकार ने ज्वेलरी बॉक्स को रिलीज करने के निर्देश भी जारी कर दिए थे। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया। आरोप है कि जाकिर उस्मान और सुकेश गुप्ता ने कथित रूप से ज्वेलरी बॉक्स को केवल अपने नाम पर रिलीज करा लिया और समझौते के विपरीत उसे बेचने की कोशिश करने लगे।
राजेश अग्रवाल का आरोप है कि आरोपियों ने झूठे वादों और भरोसे का सहारा लेकर उन्हें निवेश करने के लिए प्रेरित किया और बाद में उनके पैसे का दुरुपयोग किया। इतना ही नहीं, कानूनी कार्यवाही के दौरान भी यह सामने आया कि समझौता होने के बावजूद निवेश की गई राशि का उपयोग उसके मूल उद्देश्य के लिए नहीं किया गया।
मामले में शिकायतकर्ता ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए तेलंगाना हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की है, वहीं हैदराबाद की एक स्थानीय अदालत में सिविल मुकदमा भी दायर किया गया है। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि उन्हें ज्वेलरी बॉक्स में उनका वैधानिक हिस्सा दिलाया जाए और आरोपियों को उसे बेचने से रोका जाए।
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शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि केस लंबित रहने के दौरान उन्हें यह जानकारी मिली कि उनके द्वारा दी गई रकम को ज्वेलरी रिलीज प्रक्रिया में उपयोग करने के बजाय अन्य कार्यों में खर्च किया गया। इससे पूरे मामले में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप और मजबूत हो गए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हैदराबाद पुलिस के सेंट्रल क्राइम स्टेशन (CCS) ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां अब फंड के ट्रेल, संबंधित कंपनियों के लेन-देन और ज्वेलरी बॉक्स की वास्तविक स्थिति की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस पूरे प्रकरण में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिल रहे हैं कि यह मामला केवल एक साधारण कारोबारी विवाद नहीं है, बल्कि सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया आर्थिक अपराध हो सकता है। इसमें विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर पहलुओं की जांच की जा रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला बड़े वित्तीय लेन-देन और निजी समझौतों में पारदर्शिता की कमी को उजागर करेगा। ऐसे मामलों में उचित सत्यापन और कानूनी सुरक्षा उपायों की अनदेखी निवेशकों के लिए भारी नुकसान का कारण बन सकती है।
फिलहाल, जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को उजागर करने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि ज्वेलरी डील के नाम पर करोड़ों रुपये का यह खेल किस तरह रचा गया और इसके पीछे कौन-कौन जिम्मेदार हैं।
