हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के कथित एससीओ (Shop-cum-Office) आवंटन फर्जीवाड़ा मामले में जिला अदालत ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) से जांच की प्रगति पर स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 सितंबर की तारीख तय करते हुए ACB को तब तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने और बिना अनावश्यक देरी के जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
अदालत के समक्ष सुनवाई के दौरान जांच की वर्तमान स्थिति पर जानकारी मांगी गई। इसके बाद न्यायालय ने जांच एजेंसी को निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने 28 नवंबर 2022 को आपराधिक साजिश, कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इससे पहले विजिलेंस ने 10 मई 2019 को प्राप्त एक शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू की थी।
शिकायत के अनुसार, सेक्टर-23 में स्थित कुछ एससीओ की नीलामी के दौरान दिल्ली की एक कंपनी ने दो एससीओ के लिए सफल बोली लगाई थी। आरोप है कि निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने के कारण तत्कालीन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (तत्कालीन हुडा) ने 10 अप्रैल 1998 को दोनों आवंटन रद्द कर दिए थे।
जांच में आरोप लगाया गया कि आवंटन रद्द होने के बावजूद 21 अप्रैल 2010 को इन दोनों एससीओ से जुड़े अधिकार कथित रूप से एक सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के माध्यम से नारायणा, दिल्ली निवासी एक व्यक्ति के नाम स्थानांतरित किए गए। इसके बाद संबंधित व्यक्ति ने GPA के आधार पर आवंटन बहाल कराने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया।
मामले में आगे आरोप है कि मुख्य प्रशासक कार्यालय से संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया, जिसके बाद तत्कालीन संबंधित अधिकारी ने जून 2018 में दोनों एससीओ के आवंटन पत्र जारी कर दिए। शिकायत के अनुसार, लगभग 21 वर्ष बाद भी इन संपत्तियों का आवंटन वर्ष 1997 की मूल कीमत पर ही कर दिया गया।
कथित अनियमितताओं का पता चलने के बाद अगस्त 2018 में दोनों आवंटन रद्द कर दिए गए। इसके बाद विजिलेंस जांच के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई और मामले में आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। अदालत ने जांच एजेंसी को समयबद्ध तरीके से जांच पूरी कर अगली सुनवाई से पहले विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।
