पश्चिम एशिया में जारी तनाव भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए चुनौती बन सकता है। वैश्विक शोध संस्था BMI Research ने चेतावनी दी है कि अगर Strait of Hormuz बंद होता है, तो ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के साथ भारत की सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर में लगभग 0.5 प्रतिशत अंक तक की कमी आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति निवेश प्रवाह और व्यापार गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च के बाद वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ने की संभावना है। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपना सकते हैं। इसका सीधा असर उभरते बाजारों, खासकर दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति अधिक संवेदनशील मानी जा रही है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आता है। यदि समुद्री मार्ग बाधित होता है या बीमा कंपनियां टैंकरों को कवर देना बंद कर देती हैं, तो तेल परिवहन लागत तेजी से बढ़ सकती है। इससे घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर दबाव बन सकता है और महंगाई दर ऊपर जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा लागत बढ़ने से उद्योगों की उत्पादन लागत भी प्रभावित होगी।
पश्चिम एशिया संघर्ष का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक व्यापार समझौतों से मिलने वाले संभावित लाभ भी कम हो सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि India के लिए यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार विस्तार की संभावनाओं पर अनिश्चितता का माहौल बन सकता है। हालांकि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौतों से निर्यात क्षेत्र को दीर्घकाल में लाभ मिलने की उम्मीद भी जताई गई है।
बीएमआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर लगभग 7 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि भू-राजनीतिक परिस्थितियां बदलने पर यह अनुमान संशोधित हो सकता है। रिपोर्ट में निवेशकों को सतर्क रहने और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
FCRF Launches Flagship Certified Fraud Investigator (CFI) Program
पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों के बाद सुरक्षा जोखिम बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। फरवरी महीने में अमेरिका और सहयोगी देशों द्वारा किए गए सैन्य हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है। जवाबी कार्रवाई के रूप में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख कारोबारी शहरों में भी सुरक्षा चिंता बढ़ने की खबरें सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर होर्मुज जलमार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति श्रृंखला में बड़ा व्यवधान पैदा हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक बाजार में तेजी से बढ़ सकती हैं। कुछ विश्लेषकों ने आशंका जताई है कि अस्थिरता बढ़ने पर तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर सकती हैं।
भारत सरकार और नीति निर्माताओं की नजर मौजूदा वैश्विक स्थिति पर बनी हुई है। ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाना और आयात स्रोतों का विस्तार करना भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी परीक्षा के रूप में उभर सकता है। निवेश, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई—इन सभी मोर्चों पर सावधानी और संतुलित नीति की आवश्यकता बताई जा रही है। आने वाले महीनों में वैश्विक घटनाक्रम भारत की आर्थिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
