हैदराबाद पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार ने कहा कि साइबर ठगी से शहर में रोजाना करीब ₹1 करोड़ का नुकसान हो रहा है।

CSP सेंटर की आड़ में साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा, कई राज्यों तक फैला मामला

Team The420
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गुवाहाटी। बाजाली जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के दौरान एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जो कथित तौर पर कस्टमर सर्विस पॉइंट (CSP) सेंटरों की आड़ में कई राज्यों तक फैला हुआ था। इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार निवासी आदित्य तिवारी और राहुल कुमार, बाजाली के हाकरटुप गांव निवासी जितुमोनी राय तथा कामरूप के पुथमारी गांव निवासी रंजन दास के रूप में हुई है।

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प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आदित्य तिवारी और राहुल कुमार स्थानीय स्तर पर संपर्क बनाकर ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे जो आर्थिक रूप से कमजोर या बुजुर्ग थे। इनसे बैंक खाता, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड जैसे दस्तावेज हासिल कर लिए जाते थे और बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के पैसों को ट्रांसफर करने में किया जाता था।

इन खातों को म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जिनमें देशभर में होने वाली ऑनलाइन ठगी की रकम जमा की जाती थी। इसके बाद यह पैसा अलग-अलग CSP केंद्रों के जरिए आगे ट्रांसफर किया जाता था, जहां छोटे-छोटे लेनदेन के जरिए रकम को कई खातों में घुमाया जाता था और एजेंटों को कमीशन दिया जाता था।

मामला तब सामने आया जब क्षेत्र के कई CSP ऑपरेटरों ने पाया कि उनके बैंक खातों को अचानक फ्रीज कर दिया गया है और उनमें संदिग्ध लेनदेन दर्ज किए गए हैं। इसके बाद उन्होंने स्थानीय पुलिस से संपर्क किया, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।

जांच के दौरान मोबाइल नंबरों की ट्रैकिंग और कई स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया गया, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कई एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक और चेकबुक बरामद किए हैं। इन दस्तावेजों का उपयोग कथित तौर पर साइबर फ्रॉड के पैसों को विभिन्न खातों में ट्रांसफर करने और पहचान छिपाने के लिए किया जा रहा था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच में कई महत्वपूर्ण ट्रांजैक्शन ट्रेल मिले हैं, जो इस नेटवर्क को सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी जोड़ते हैं। इससे यह संकेत मिला है कि यह एक संगठित इंटरस्टेट साइबर फ्रॉड नेटवर्क हो सकता है।

आरोपियों को अदालत में पेश कर तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। आगे की जांच में इस बात की पड़ताल की जा रही है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं और कितनी राशि का लेनदेन अब तक किया जा चुका है।

जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे रैकेट में सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था, जिसमें लोगों को झांसे में लेकर उनके दस्तावेज हासिल किए जाते थे और बाद में उन्हीं के नाम पर बैंक खाते खोलकर उनका दुरुपयोग किया जाता था।

इन खातों को बाद में अलग-अलग राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों के नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था, जिससे पैसों की ट्रैकिंग लगभग असंभव हो जाती थी। पुलिस का मानना है कि CSP सेंटरों की आड़ में यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी।

स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई के बाद बैंकिंग सेक्टर और CSP ऑपरेटरों में सतर्कता बढ़ गई है और संदिग्ध ट्रांजैक्शन की रिपोर्टिंग में तेजी देखी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल लेनदेन के बढ़ते उपयोग के साथ म्यूल अकाउंट आधारित साइबर फ्रॉड एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है और इसे रोकने के लिए KYC प्रक्रिया को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड और व्यक्तिगत दस्तावेज किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।

अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां संभव हैं।

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