ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 के तहत बड़ी कार्रवाई; सैकड़ों शिकायतों से जुड़े आरोपी, निवेश और UPI फ्रॉड के जरिए उड़ाए गए करोड़ों रुपये

“₹288 करोड़ का साइबर फ्रॉड नेटवर्क ध्वस्त: 8 गिरफ्तार, ‘म्यूल अकाउंट’ रैकेट से पूरे देश में फैला था जाल”

Roopa
By Roopa
4 Min Read

गुजरात। राज्य में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0” के तहत गुजरात CID ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह नेटवर्क कथित तौर पर ₹288 करोड़ से अधिक के साइबर फ्रॉड लेन-देन में शामिल पाया गया है, जो देशभर में फैले सैकड़ों मामलों से जुड़ा हुआ है।

CID के अनुसार, यह कार्रवाई राज्य के विभिन्न शहरों—सूरत, राजकोट, भावनगर और ऊंझा—में कई दिनों तक चली समन्वित छापेमारी के बाद की गई। जांच में सामने आया कि आरोपी एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे थे, जो म्यूल बैंक खातों के जरिए अवैध धन को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने का काम करते थे।

अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क फर्जी नामों और कंपनियों के आधार पर बैंक खाते खोलता था। इन खातों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड से प्राप्त रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। बाद में इस धन को नकद में बदलकर हवाला और पारंपरिक ‘अंगड़िया’ नेटवर्क के जरिए बाहर भेज दिया जाता था, ताकि पैसों का स्रोत छिपाया जा सके।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुकेश मेर, फरीदखान नसीरखान पठान, अक्षय पटेल, देवेंद्र पटेल, चेतन नारणभाई अमलानी, जतिन कक्कड़, कपिलभाई कोटक और महेंद्र कोकिया के रूप में हुई है।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कमीशन के बदले अपने बैंक खातों को अवैध लेन-देन के लिए उपलब्ध कराते थे या दूसरों के खाते जुटाकर इस नेटवर्क को सपोर्ट करते थे। यह नेटवर्क ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी, UPI फ्रॉड, फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और जमा योजनाओं से जुड़े मामलों को अंजाम देता था।

सिर्फ सूरत और भावनगर से जुड़े मामलों में ही 181 साइबर फ्रॉड शिकायतें और 81 FIR दर्ज होने की जानकारी मिली है, जिनमें कुल नुकसान ₹174 करोड़ से अधिक बताया गया है। वहीं ऊंझा क्षेत्र में 125 शिकायतें सामने आई हैं, जिनमें ₹114 करोड़ से अधिक के ट्रांजैक्शन शामिल हैं।

राजकोट में दर्ज मामलों में 26 शिकायतें और लगभग ₹59.79 लाख की धोखाधड़ी का भी खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने मोबाइल फोन, लैपटॉप और कई दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनमें फर्जी कंपनियों और पहचान पत्रों से जुड़े सबूत मिले हैं।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

पिछले एक महीने में ही गुजरात में 1,039 शिकायतों के आधार पर 40 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनसे जुड़े कुल फ्रॉड की राशि ₹622 करोड़ बताई गई है।

CID अधिकारियों ने बताया कि म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिन्हें जानबूझकर या कभी-कभी अनजाने में अपराधियों द्वारा अवैध धन के ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ये खाते असली अपराधियों तक पहुंच को छिपाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि यह नेटवर्क अत्यंत संगठित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें अलग-अलग लोग खाता खोलने, पैसे की लेयरिंग और कैश निकासी जैसे काम संभालते थे।

अधिकारियों ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे किसी भी स्थिति में अपने बैंक विवरण, OTP या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें, क्योंकि साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं।

जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के मामलों में देशभर में एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जिसके तार अन्य राज्यों और संभवतः अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े हो सकते हैं।

फिलहाल जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच जारी है, जिससे इस पूरे रैकेट के और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

हमसे जुड़ें

Share This Article