चंडीगढ़/लुधियाना। पंजाब में अब तक के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी ठगी मामलों में से एक का खुलासा हुआ है, जिसमें लुधियाना के एक उद्योगपति से करीब ₹19.84 करोड़ की धोखाधड़ी की गई। जांच में सामने आया है कि यह पूरा घोटाला एक संगठित साइबर सिंडिकेट द्वारा चलाया जा रहा था, जिसने 15 बैंकों के 76 फर्जी (म्यूल) खातों के जरिए पूरी रकम को अलग-अलग राज्यों में ट्रांसफर कर दिया।
प्राथमिक जांच के अनुसार, यह ठगी फेसबुक पर एक फर्जी प्रोफाइल के जरिए शुरू हुई, जहां पीड़ित को निवेश के आकर्षक अवसरों का लालच दिया गया। बाद में उसे व्हाट्सएप के जरिए “कस्टमर सपोर्ट” से जोड़ा गया और एक नकली क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश कराने के लिए प्रेरित किया गया।
फर्जी वेबसाइट और नकली मुनाफे का डिजिटल जाल
जांच एजेंसियों ने पाया है कि आरोपियों ने एक बेहद वास्तविक दिखने वाली फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट तैयार की थी, जिसमें लाइव मार्केट डेटा, बढ़ते मुनाफे और नकली डिजिटल डैशबोर्ड दिखाए जाते थे। इसी भ्रम के आधार पर पीड़ित को लगातार निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।
शुरुआत में छोटे निवेश पर “मुनाफा” दिखाकर भरोसा जीता गया, जिसके बाद धीरे-धीरे बड़े ट्रांजैक्शन कराए गए। जांच में यह भी सामने आया है कि नवंबर 2025 के अंतिम दिनों में ही पीड़ित से ₹5 करोड़ से अधिक की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई गई।
76 म्यूल खातों के जरिए पूरी रकम का रूटिंग सिस्टम
जांच में सबसे अहम खुलासा यह हुआ है कि पूरा पैसा 76 अलग-अलग बैंक खातों में भेजा गया, जो देशभर में फैले हुए थे। ये खाते दिल्ली, मुंबई, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब और बेंगलुरु सहित कई जगहों पर खोले गए थे।
इन खातों का इस्तेमाल सिर्फ पैसे को घुमाने और उसकी असली पहचान छिपाने के लिए किया गया था। बैंकिंग नेटवर्क के भीतर IDFC, ICICI, बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्सिस बैंक, बंधन बैंक सहित लगभग 15 बैंकों के खाते शामिल पाए गए हैं।
मास्टरमाइंड और फर्जी पहचान का इस्तेमाल
जांच में सामने आया है कि इस पूरे सिंडिकेट को एक संगठित नेटवर्क द्वारा ऑपरेट किया जा रहा था, जिसमें अलग-अलग लोग अलग-अलग भूमिकाएं निभा रहे थे। कुछ लोग फर्जी कंपनियां बनाते थे, कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म ऑपरेट करते थे, और कुछ म्यूल खातों का प्रबंधन करते थे।
पीड़ित को शुरुआत में एक महिला “अनायिका रॉय” के नाम से संपर्क किया गया, जिसने धीरे-धीरे विश्वास कायम कर निवेश की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। बाद में कई अन्य फर्जी पहचान के जरिए लगातार दबाव बनाकर निवेश करवाया गया।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
नकली रिटर्न दिखाकर और पैसा डलवाया गया
जांच रिपोर्ट के अनुसार, फर्जी प्लेटफॉर्म पर पीड़ित के निवेश को 4.3 मिलियन डॉलर से अधिक दिखाया गया, जिससे उसे यह विश्वास हो गया कि उसका पैसा तेजी से बढ़ रहा है। इसी लालच में उसने और अधिक रकम ट्रांसफर की।
अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रणाली मनोवैज्ञानिक दबाव और तकनीकी धोखे का मिश्रण थी, जिसमें निवेशक को लगातार यह विश्वास दिलाया जाता रहा कि उसका पैसा सुरक्षित और बढ़ रहा है।
साइबर पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई
साइबर क्राइम डिवीजन ने इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है और डिजिटल लेनदेन की ट्रेलिंग की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह सिर्फ एक केस नहीं बल्कि एक बड़े अंतर-राज्यीय साइबर सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और इस नेटवर्क के विदेशी लिंक भी सामने आ सकते हैं। फिलहाल आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश तेज कर दी गई है।
बढ़ता साइबर खतरा और चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया प्रोफाइल और हाई रिटर्न स्कीम सबसे बड़े हथियार बन चुके हैं। आम लोगों को किसी भी अनजान निवेश ऑफर से सावधान रहने की जरूरत है।
फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है और अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म पर भरोसा करने से पहले पूरी तरह सत्यापन जरूर करें।
