दिल्ली में दो अवैध फैक्ट्रियों पर छापा, 1 लाख नकली ENO और 50,000 कॉफी सैशे जब्त; ब्रांडेड पैकेजिंग की आड़ में चल रहा था बड़ा फूड फ्रॉड नेटवर्क

“दिल्ली में फूड सेफ्टी पर बड़ा वार: करोड़ों का नकली ENO-कॉफी रैकेट पकड़ा गया”

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली। राजधानी में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां दिल्ली क्राइम ब्रांच ने नकली और मिलावटी खाद्य उत्पादों के एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में 1 लाख से अधिक नकली ENO एंटासिड सैशे और करीब 50,000 नकली Nescafé कॉफी पैकेट जब्त किए गए हैं। यह पूरा रैकेट ब्रांडेड पैकेजिंग की आड़ में लंबे समय से अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था।

अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई खुफिया इनपुट के आधार पर की गई, जिसमें संकेत मिले थे कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दो अवैध उत्पादन इकाइयां बड़े पैमाने पर नकली उपभोक्ता उत्पाद तैयार कर रही हैं। छापेमारी के दौरान टीमों ने मौके से फिलिंग मशीनें, पैकिंग सामग्री, रासायनिक कच्चा माल और बड़ी मात्रा में ब्रांडेड जैसी दिखने वाली पैकेजिंग सामग्री बरामद की, जिसका इस्तेमाल असली उत्पादों की नकल करने में किया जा रहा था।

जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। कच्चे माल की खरीद से लेकर उत्पादन, पैकेजिंग और वितरण तक अलग-अलग स्तरों पर लोग तैनात थे। तैयार किए गए नकली उत्पादों को छोटे थोक विक्रेताओं और स्थानीय दुकानों के जरिए बाजार में सप्लाई किया जाता था, जिससे आम उपभोक्ता आसानी से धोखे का शिकार हो रहे थे।

इस कार्रवाई में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी बड़े पैमाने पर सस्ते और निम्न गुणवत्ता वाले कच्चे माल का उपयोग कर नकली उत्पाद तैयार करते थे और फिर उन्हें प्रसिद्ध ब्रांडों की पैकेजिंग में भरकर बाजार में उतार देते थे। इससे न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा था, बल्कि ब्रांड की विश्वसनीयता पर भी गंभीर असर पड़ रहा था।

अधिकारियों ने बताया कि यह नेटवर्क केवल एक स्थान तक सीमित नहीं था, बल्कि कई स्थानों पर फैले यूनिट्स आपस में जुड़े हुए थे। अलग-अलग यूनिट्स में उत्पादन, पैकेजिंग और सप्लाई चेन का काम बंटा हुआ था, जिससे पूरे सिस्टम को पकड़ना मुश्किल हो जाता था। आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है।

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फूड और हेल्थ प्रोडक्ट्स में मिलावट का यह मामला नया नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां नकली या मिलावटी उत्पादों ने बाजार में अपनी जगह बनाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती मांग, ब्रांडेड उत्पादों की लोकप्रियता और कीमतों में अंतर इस तरह के अवैध कारोबार को बढ़ावा देता है।

इसी बीच, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी है। FSSAI के अनुसार, कॉफी जैसे उत्पादों में मिलावट की पहचान घर पर भी कुछ सरल तरीकों से की जा सकती है। एक सामान्य परीक्षण में कॉफी पाउडर को पानी में डालने पर यदि वह नीचे बैठ जाए और तलछट दिखे तो उसमें मिलावट की संभावना हो सकती है। वहीं शुद्ध कॉफी धीरे-धीरे घुलती है और सतह पर तैरती है।

एक अन्य परीक्षण में यह देखा जाता है कि कॉफी में चिकोरी की मिलावट है या नहीं। यदि मिश्रण जल्दी रंग छोड़ता है या असामान्य रूप से घुलता है, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ये घरेलू परीक्षण केवल प्रारंभिक संकेत देते हैं, अंतिम पुष्टि लैब जांच से ही संभव है।

अधिकारियों ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे पैकेज्ड उत्पाद खरीदते समय निर्माण तिथि, बैच नंबर और FSSAI लाइसेंस विवरण की जांच जरूर करें। किसी भी तरह की असामान्य गंध, स्वाद या गुणवत्ता महसूस होने पर तुरंत संबंधित विभाग को सूचित किया जाना चाहिए।

फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन और वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं और पूरे रैकेट का दायरा और स्पष्ट होगा।

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