गुजरात पुलिस की कार्रवाई में बैंकिंग प्रणाली को निशाना बनाने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, 7 आरोपी गिरफ्तार

गुजरात पुलिस की बड़ी कार्रवाई: बैंकिंग प्रणाली को निशाना बनाने वाला अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह ध्वस्त, सात गिरफ्तार, सरगना फरार

Team The420
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अहमदाबाद। गुजरात पुलिस के साइबर उत्कृष्टता केंद्र ने एक बड़े और अत्यंत संगठित अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने देशभर के 15 से अधिक बैंकों को निशाना बनाकर करीब ₹210 करोड़ की अवैध रकम हड़प ली। यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और डिजिटल बैंकिंग प्रणाली की कमजोरियों का फायदा उठाकर सुनियोजित तरीके से ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस नेटवर्क का संचालन कई राज्यों में फैला हुआ था, जिसमें गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि गिरोह का मुख्य सरगना अब भी फरार है, जो कथित रूप से दूर बैठे पूरे नेटवर्क को नियंत्रित कर रहा था।

जांच में सामने आया है कि आरोपी बैंकों की कोर बैंकिंग प्रणाली की तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाते थे। वे पहले पुराने या निष्क्रिय खातों की पहचान करते थे और फिर उन खातों से जुड़े मोबाइल नंबर बदलकर नियंत्रण हासिल कर लेते थे। इसके बाद वास्तविक खाताधारक को इसकी कोई जानकारी नहीं होती थी और पूरा नियंत्रण अपराधियों के हाथ में चला जाता था।

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एक बार सिस्टम में प्रवेश मिल जाने के बाद आरोपी बैंकिंग रिकॉर्ड में हेरफेर कर बिना अनुमति के वर्चुअल धनराशि उत्पन्न कर लेते थे। इसी तरीके से एक सहकारी बैंक से एक ही रात में लगभग ₹7 करोड़ की ठगी की गई, जिसने इस पूरे नेटवर्क की तेज और संगठित कार्यशैली को उजागर किया।

इसके बाद चोरी की गई रकम को 135 से अधिक माध्यम खातों में भेज दिया जाता था। ये खाते उन व्यक्तियों से किराए पर लिए जाते थे, जिन्हें पैसे का लालच देकर इस अवैध नेटवर्क में शामिल किया गया था। इसके बाद धन को कई परतों में विभाजित कर अलग-अलग खातों और बैंकों में भेजा जाता था, ताकि पैसे के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाए।

जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि यह गिरोह केवल कुछ मामलों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार देशभर में दर्ज कम से कम 273 साइबर अपराध मामलों से जुड़े हुए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि यह एक दीर्घकालिक और संगठित साइबर ठगी नेटवर्क था, जिसने लगभग ₹210 करोड़ का नुकसान पहुंचाया।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और उपकरण जब्त किए, जिनमें बैंक पासबुक, डेबिट कार्ड, चेकबुक और मोबाइल फोन शामिल हैं। इसके अलावा जांच टीम ने ₹2 करोड़ से अधिक की संदिग्ध राशि को फ्रीज कर दिया है, जिससे आगे धन के दुरुपयोग को रोका जा सके।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि यह पूरा ऑपरेशन पारंपरिक फिशिंग पर आधारित नहीं था, बल्कि यह बैंकिंग प्रणाली के भीतर तकनीकी स्तर पर किए गए हेरफेर पर आधारित था। आरोपी सिस्टम के अंदर ही लेन-देन को बदलने और नियंत्रित करने में सक्षम थे।

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अपराधों में तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय निगरानी भी बेहद आवश्यक है। विशेष रूप से निष्क्रिय खातों की नियमित जांच और मजबूत प्रमाणीकरण व्यवस्था ऐसे अपराधों को काफी हद तक रोक सकती है।

अधिकारियों ने बताया कि जांच अभी जारी है और डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण के माध्यम से यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय संबंध भी हैं या नहीं। साथ ही अन्य राज्यों में फैले सहयोगी गिरोहों की भी पहचान की जा रही है।

यह कार्रवाई हाल के वर्षों की सबसे बड़ी साइबर ठगी कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है, जिसने बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा और डिजिटल लेन-देन की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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