शहर के राजघाट थाना क्षेत्र में खुद को जीएसटी अधिकारी बताकर सराफा व्यापारी के कर्मचारी से ₹9.50 लाख की टप्पेबाजी करने वाले गिरोह के दो शातिर जालसाजों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के पास से ₹1.80 लाख नकद, वारदात में इस्तेमाल कार और बाइक भी बरामद की गई है। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है, जबकि गिरोह के चार अन्य सदस्य अभी फरार बताए जा रहे हैं।
जांच के दौरान सामने आया कि यह वारदात 30 जनवरी को घंटाघर इलाके में हुई थी। पीपीगंज निवासी सराफा व्यापारी बलिराम जायसवाल की क्षेत्र में दो आभूषण दुकानें हैं। घटना के दिन सुबह करीब 11:15 बजे उनका कर्मचारी संजय पाल दुकान से ₹9.50 लाख नकद लेकर गीता प्रेस रोड स्थित बैंक में जमा करने जा रहा था।
रास्ते में रोककर खुद को बताया GST अधिकारी
बताया गया कि कर्मचारी जैसे ही कालीबाड़ी मंदिर के पास स्थित मुंबई क्लॉथ हाउस के पास पहुंचा, तभी बाइक सवार दो युवक वहां पहुंचे। उनमें से एक ने खुद को जीएसटी अधिकारी बताते हुए कर्मचारी को रोक लिया और पूछताछ के नाम पर रौब जमाने लगा।
आरोपी ने कर्मचारी से रुपये से भरा बैग अपने पास ले लिया और कहा कि नकदी से जुड़े जीएसटी के कागजात दिखाए जाएं। जब कर्मचारी ने बताया कि उसके पास कागजात नहीं हैं, तो आरोपी ने उसे कागजात लाने के लिए दुकान भेज दिया और कहा कि बैग यहीं छोड़कर जाओ।
कर्मचारी जब घबराकर कागजात लेने दुकान की ओर लौटा, उसी दौरान दोनों जालसाज बाइक से रुपयों से भरा बैग लेकर फरार हो गए।
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300 से अधिक CCTV कैमरों की मदद से हुई पहचान
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। गोरखपुर के साथ-साथ आसपास के जिलों के कैमरों से भी सुराग जुटाए गए।
तकनीकी जांच और फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई और बाद में उन्हें उस समय गिरफ्तार किया गया जब वे गोरखपुर में फिर से वारदात करने की फिराक में थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हैदर अली, निवासी टावर मोहल्ला, पिपरिया, जिला होशंगाबाद (मध्यप्रदेश) और मुस्तफा अली, निवासी गढ़ी जलालपुर, जिला बाराबंकी के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे एक ऐसे गिरोह से जुड़े हैं, जिसे आमतौर पर ‘ईरानी गैंग’ के नाम से जाना जाता है।
आरोपियों के अनुसार गिरोह के चार अन्य सदस्य भी इस वारदात में शामिल थे, जिनकी तलाश की जा रही है।
देशभर में घूमकर अफसर बनकर करते हैं ठगी
जांच में यह भी सामने आया कि इस गिरोह के सदस्य देश के अलग-अलग शहरों में घूमकर खुद को सरकारी अधिकारी या जांच एजेंसी का कर्मचारी बताकर लोगों को ठगते हैं। गिरोह पहले लोगों को डराकर या भ्रमित करके नकदी या कीमती सामान अपने कब्जे में ले लेता है और फिर मौके से फरार हो जाता है।
सूत्रों के अनुसार गिरोह के कुछ सदस्य पहले भी महाराष्ट्र में टप्पेबाजी के मामलों में पकड़े जा चुके हैं।
पहले भी दर्ज हैं आपराधिक मामले
जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी हैदर अली के खिलाफ पहले भी आपराधिक मामले दर्ज हैं। वर्ष 2009 में मध्यप्रदेश के एक थाने में चोरी के मामले में उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। हालांकि बाद में वह अलग-अलग जगहों पर इसी तरह की घटनाओं को अंजाम देता रहा।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों से पूछताछ में गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी मिली है। पुलिस अब उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस गिरोह ने देश के कई शहरों में इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दिया हो सकता है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।
