केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने घर खरीदारों से कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक बड़े मामले में अपनी जांच आगे बढ़ाते हुए ग्रेटर नोएडा की एक हाउसिंग परियोजना के संबंध में रुद्रा बिल्डवेल प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके एक निदेशक के खिलाफ 13वीं चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी का आरोप है कि कंपनी ने कथित रूप से झूठे आश्वासनों और भ्रामक दावों के जरिए घर खरीदारों और निवेशकों को अपने जाल में फंसाया।
CBI के अनुसार, जांच में सामने आया कि आरोपी बिल्डर कंपनी और उसके निदेशक ने कथित आपराधिक साजिश के तहत परियोजना से जुड़े निवेशकों और खरीदारों को आकर्षित करने के लिए भ्रामक वादे किए। एजेंसी का आरोप है कि इस कथित धोखाधड़ी के माध्यम से आरोपियों ने अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त किया, जबकि खरीदारों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर CBI ने सक्षम अदालत में भारतीय दंड संहिता की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की है। अदालत अब मामले में आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया करेगी।
CBI फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर देशभर में विभिन्न बिल्डर कंपनियों तथा वित्तीय संस्थानों के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ दर्ज 36 अन्य मामलों की भी जांच कर रही है। इन मामलों में घर खरीदारों से कथित धोखाधड़ी, आवासीय परियोजनाओं के लिए जुटाई गई धनराशि के कथित दुरुपयोग और फंड डायवर्जन जैसे आरोपों की जांच की जा रही है।
इससे पहले एजेंसी रुद्रा बिल्डवेल कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड, ड्रीम प्रोकोन प्राइवेट लिमिटेड, जयप्रकाश इंफ्राटेक लिमिटेड, एवीजे डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, सीएचडी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, सीक्वेल बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड, लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मंजू जे होम्स इंडिया लिमिटेड, शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, नाइनेक्स डेवलपर्स लिमिटेड और डीसेंट बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड सहित कई रियल एस्टेट कंपनियों तथा उनके निदेशकों के खिलाफ 12 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। कुछ मामलों में बैंकों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों के खिलाफ भी आरोपपत्र दायर किए गए हैं।
CBI ने कहा कि आर्थिक अपराध, भ्रष्टाचार और आम नागरिकों, विशेषकर घर खरीदारों से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए एजेंसी अपनी जांच जारी रखे हुए है।
साइबर एवं वित्तीय अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े रियल एस्टेट निवेश से पहले परियोजना की कानूनी स्थिति, नियामकीय स्वीकृतियों, वित्तीय रिकॉर्ड, एस्क्रो व्यवस्था और बिल्डर की पृष्ठभूमि का स्वतंत्र सत्यापन करना आवश्यक है। उनका कहना है कि पारदर्शिता और समय पर नियामकीय निगरानी से इस प्रकार की कथित वित्तीय धोखाधड़ी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
