गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में शाहपुर थाना पुलिस और साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम ने ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में संचालित कथित अंतरराज्यीय सट्टेबाजी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने ‘रेडी अन्ना’ नामक अवैध गेमिंग पोर्टल की स्थानीय ब्रांच चलाने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह पिछले करीब छह महीने से शाहपुर क्षेत्र में किराए के मकान से ऑनलाइन सट्टेबाजी और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन का संचालन कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, गिरोह का मुख्य सरगना और उसके दो प्रमुख सहयोगी अभी फरार हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान देवरिया निवासी नीतीश सिंह और अभय कुमार सिंह, मुजफ्फरनगर निवासी वाजीद चौधरी और साहिल चौधरी तथा बिहार के सीवान निवासी मुन्ना कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी अलग-अलग स्तर पर ऑनलाइन सट्टेबाजी के संचालन और वित्तीय लेन-देन से जुड़े काम संभाल रहे थे।
जांच में सामने आया कि आरोपी ‘रेडी अन्ना’ वेबसाइट का एडमिन पैनल लेकर उसकी स्थानीय ब्रांच संचालित कर रहे थे। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों, खासकर युवाओं को कम समय में अधिक पैसा कमाने का लालच देकर सट्टेबाजी से जोड़ने का आरोप है। पोर्टल पर रकम जमा कराने और निकासी की व्यवस्था के लिए अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था।
म्यूल बैंक खातों से होता था लेन-देन
पुलिस के अनुसार, नेटवर्क में ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिन्हें कथित तौर पर अन्य लोगों के नाम पर खोला गया था। इन म्यूल खातों के जरिए सट्टेबाजी की रकम जमा और ट्रांसफर की जाती थी। प्रारंभिक जांच में इन खातों से रोजाना लाखों रुपये के लेन-देन के संकेत मिले हैं। दिनभर के कारोबार के बाद कथित मुनाफे को गिरोह से जुड़े अलग-अलग लोगों के बीच बांटने की व्यवस्था होने की बात भी सामने आई है।
पुलिस की कार्रवाई शाहपुर थाना क्षेत्र के सेमरा नंबर स्थित पानी की टंकी के पास एक किराए के मकान में की गई। सूचना के आधार पर टीम ने गुरुवार सुबह यहां छापा मारा। पुलिस का दावा है कि मौके पर आरोपी ऑनलाइन गतिविधियां संचालित करते मिले। तलाशी के दौरान बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए गए।
23 मोबाइल और बैंकिंग दस्तावेज बरामद
पुलिस ने मौके से 23 स्मार्टफोन और मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, एक मिनी लैपटॉप और तीन टैबलेट बरामद किए। इसके अलावा 11 एटीएम या डेबिट कार्ड, 16 बैंक पासबुक और चेकबुक, एक बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट डिवाइस, हाई-स्पीड वाई-फाई राउटर, पावर बैंक और कई वित्तीय दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस को आशंका है कि बरामद उपकरणों में सट्टेबाजी के पैनल, ग्राहक विवरण, बैंकिंग लेन-देन और नेटवर्क से जुड़े अन्य डिजिटल साक्ष्य मौजूद हो सकते हैं।
सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर साइबर और फोरेंसिक विश्लेषण के लिए भेजा गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन उपकरणों से कितने लोगों को सट्टेबाजी नेटवर्क से जोड़ा गया था और कुल कितनी रकम का लेन-देन हुआ। बैंक खातों की भी जांच की जा रही है, ताकि धन के स्रोत और अंतिम लाभार्थियों का पता लगाया जा सके।
पुलिस ने गिरफ्तार पांचों आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। पुलिस के मुताबिक, गिरोह का कथित सरगना संजीव सिंह तथा उसके सहयोगी नितिश प्रताप सिंह और सुनीश कुमार सिंह फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बैंक खातों, डिजिटल उपकरणों और ऑनलाइन पैनल की विस्तृत जांच से नेटवर्क की वास्तविक पहुंच और वित्तीय कारोबार का पता चल सकता है। जांच आगे बढ़ने पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और दूसरे राज्यों में सक्रिय उसकी शाखाओं के बारे में भी जानकारी सामने आने की संभावना है।
