गोरखपुर। सरकारी योजनाओं का लालच देकर बैंक खाते खुलवाने और उन्हें साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल करने वाले एक संगठित गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपियों में गोरखपुर, उन्नाव, चित्रकूट और देवरिया के युवक शामिल हैं। पुलिस के अनुसार यह गिरोह म्यूल बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने का काम करता था।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के जरिए संचालित हो रहा था। गिरोह के सदस्य बेरोजगार युवकों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद पासबुक, एटीएम कार्ड और चेकबुक अपने कब्जे में लेकर इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध की रकम को ट्रांसफर और निकासी के लिए किया जाता था।
एसपी सिटी निमिष पाटिल के अनुसार, 15 मार्च को एक पीड़ित की तहरीर पर मामला दर्ज किया गया था। पीड़ित ने शिकायत में बताया कि उसके बेटे को सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर फंसाया गया और बैंक खाता खुलवाया गया। बाद में दस्तावेज अपने पास रख लिए गए और कोई लाभ नहीं दिया गया। जांच में पता चला कि उसी खाते का उपयोग साइबर फ्रॉड की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था।
जांच के दौरान पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें अनुज विश्वकर्मा उर्फ शुभम विश्वकर्मा (गोरखनाथ, गोरखपुर), ओमकार अग्रहरि (मिर्जापुर, राजघाट), ऋतुराज यादव (चित्रकूट), राहुल सिंह (गगहा), दिव्यांशु सिंह उर्फ साहिल सिंह (देवरिया), आदित्य चौधरी उर्फ सौरभ (गोरखनाथ), और रवि सिंह उर्फ रामदास (उन्नाव, वर्तमान पता लखनऊ) शामिल हैं।
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पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि ऋतुराज यादव और ओमकार अग्रहरि लोगों से संपर्क कर उन्हें जाल में फंसाते थे। इसके बाद बैंक खाते खुलवाकर उनका पूरा नियंत्रण गिरोह के पास रख लिया जाता था। खातों से जुड़ी जानकारी आगे रामदास और जॉन बाबा नामक व्यक्तियों को दी जाती थी, जो साइबर फ्रॉड की रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर निकाल लेते थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि रवि सिंह उर्फ रामदास के खिलाफ पहले से भी धोखाधड़ी और धमकी के कई मामले दर्ज हैं। गिरोह के सदस्य टेलीग्राम के माध्यम से लगातार संपर्क में रहते थे और पूरी रकम को डिजिटल लेनदेन के जरिए इधर-उधर किया जाता था।
एसपी सिटी ने बताया कि फिलहाल इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और यह भी जांच की जा रही है कि इन म्यूल खातों में कुल कितनी साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर की गई है। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क से जुड़े और भी कई लोग सक्रिय हो सकते हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह पूरी तरह से संगठित तरीके से काम कर रहा था, जिसमें खाता खुलवाने से लेकर पैसे निकालने तक अलग-अलग लोगों की भूमिका तय थी। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की डिजिटल ट्रेल और बैंकिंग रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है।
मामले के खुलासे के बाद साइबर अपराध की नई रणनीति पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, जहां बेरोजगार युवाओं को लालच देकर उनके खातों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर ठगी के लिए किया जा रहा है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह के सरकारी लाभ के नाम पर अपने बैंक दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को न सौंपें।
