गोरखपुर: शादी का सपना दिखाकर ठगी करने वाले गिरोहों की कहानियां अक्सर सामने आती हैं, लेकिन गोरखपुर में उजागर हुआ यह मामला अपनी निर्ममता और सुनियोजित साजिश के कारण अलग ही भय पैदा करता है। यहां एक महिला ने खुद को दुल्हन बनाकर पहले सोशल मीडिया के जरिए शिकार तलाशा, फिर उसे शादी के नाम पर जाल में फंसाया और अंत में अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी। यह सनसनीखेज वारदात न केवल अपराध की एक नई प्रवृत्ति की ओर इशारा करती है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ते खतरों को भी उजागर करती है।
मामले के अनुसार, मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी 45 वर्षीय इंद्र कुमार तिवारी को आरोपी महिला साहिबा बानो उर्फ खुशी तिवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने संपर्क में लिया था। शुरुआती बातचीत में उसने खुद को अविवाहित बताते हुए विवाह की इच्छा जताई और धीरे-धीरे भरोसा कायम किया। बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा तो महिला ने उसे गोरखपुर आने के लिए राजी कर लिया।
बताया जाता है कि 3 जून 2025 को जब इंद्र कुमार गोरखपुर पहुंचे, तो उन्हें आरोपियों ने अपने किराए के मकान में रिश्तेदार बताकर ठहराया। यहां से पूरी साजिश को अंजाम देने की तैयारी शुरू हो चुकी थी। दो दिन बाद, 5 जून को आरोपी महिला और उसका प्रेमी कौशल कुमार इंद्र कुमार को कुशीनगर के एक होटल ले गए, जहां नकली शादी की रस्में कराई गईं। महिला ने उसकी मांग में सिंदूर भरवाकर विवाह का नाटक रचा, जिससे पीड़ित को यह यकीन हो गया कि वह अब वैवाहिक रिश्ते में बंध चुका है।
शादी की इस औपचारिकता के तुरंत बाद आरोपी जोड़े ने अपनी असली योजना को अंजाम देना शुरू किया। आरोप है कि उन्होंने पनीर-चावल में नशीली गोलियां मिलाकर इंद्र कुमार को खिला दीं। खाना खाने के कुछ ही देर बाद वह बेहोश हो गया। इसके बाद आरोपियों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी और साक्ष्य छिपाने की कोशिश की।
जांच में सामने आया है कि यह वारदात अचानक नहीं हुई, बल्कि पूरी तरह से पूर्व नियोजित थी। आरोपियों ने पहले से ही शिकार की पहचान कर ली थी और उसके आर्थिक हालात तथा संपत्ति को ध्यान में रखते हुए उसे निशाना बनाया था। बताया जा रहा है कि आरोपी जोड़े ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखा था, जिसमें इंद्र कुमार अपनी अविवाहित स्थिति और जमीन-जायदाद का जिक्र कर रहा था। इसी जानकारी के आधार पर उसे टारगेट किया गया।
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पड़ोसियों और मकान मालिक के बयान भी इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं। जानकारी के अनुसार, आरोपी जोड़ा पिछले साल मार्च से गोरखपुर के रानीडीहा क्षेत्र स्थित दिव्यनगर में किराए के मकान में रह रहा था। उन्होंने खुद को पति-पत्नी बताकर मकान लिया था और दावा किया था कि युवक सिलाई का काम करता है, जबकि महिला प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है।
हालांकि, उनका व्यवहार शुरू से ही संदिग्ध था। मकान मालिक द्वारा पहचान पत्र मांगे जाने पर आरोपी युवक हर बार बहाना बनाकर टाल देता था। दोनों आसपास के लोगों से दूरी बनाए रखते थे और अक्सर कई दिनों तक गायब रहते थे। पूछताछ करने पर वे कभी इलाज तो कभी बाहर जाने का हवाला देकर बात टाल देते थे। इन गतिविधियों से स्थानीय लोगों को पहले ही संदेह हो चुका था।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग किस हद तक बढ़ चुका है। रिश्तों और विश्वास के नाम पर लोगों को जाल में फंसाकर न केवल ठगी की जा रही है, बल्कि अब हत्या जैसे जघन्य अपराध भी इसी माध्यम से अंजाम दिए जा रहे हैं।
फिलहाल आरोपी महिला साहिबा बानो उर्फ खुशी तिवारी और उसका प्रेमी कौशल कुमार जेल में हैं और मामले की सुनवाई जारी है। यह घटना उन सभी लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है, जो सोशल मीडिया पर बने रिश्तों को बिना पर्याप्त जांच-परख के वास्तविक जीवन में स्वीकार कर लेते हैं।
यह वारदात न केवल एक जघन्य अपराध की कहानी है, बल्कि समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि डिजिटल युग में भरोसे की सीमाएं कितनी नाजुक हो चुकी हैं। ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव बनकर उभरती है।
