गोरखपुर: सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर लोगों से बैंक खाते खुलवाकर साइबर ठगी को अंजाम देने वाले एक बड़े म्यूल अकाउंट रैकेट का खुलासा हुआ है। तिवारीपुर थाना पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि एक ही बैंक खाते के जरिए करीब ₹3 करोड़ की साइबर जालसाजी की गई है, जिसमें अधिकतर ट्रांजैक्शन दिल्ली और बेंगलुरु से जुड़े पाए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तिवारीपुर थाना क्षेत्र के जाफरा बाजार निवासी समसुलहक उर्फ शब्बू, दाउदचक निवासी सारिक अनवर और पिपरापुर निवासी सारिम के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके पास से तीन मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि ये लोग कई अन्य व्यक्तियों के नाम पर भी इसी तरह खाते खुलवाने की प्रक्रिया में शामिल थे।
मामले का खुलासा तब हुआ जब जाफरा बाजार निवासी असद ने तहरीर देकर आरोप लगाया कि उसे सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर बैंक खाता खुलवाने के लिए बहकाया गया था। पीड़ित के अनुसार, वर्ष 2025 की शुरुआत में उसकी मुलाकात आरोपियों से हुई थी। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार की गरीब कल्याण योजना के तहत खाता खुलवाने पर हर महीने ₹2,000 की सहायता राशि दी जाएगी।
झांसे में आकर असद उनके साथ बैंक गया और इंडियन ओवरसीज बैंक में खाता खुलवाया गया। आरोप है कि खाता खुलने के बाद आरोपियों ने एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक अपने पास रख ली। शुरुआत में पीड़ित को कुछ महीनों तक ₹2,000 दिए गए, जिससे उसका भरोसा बना रहा। बाद में भुगतान बंद कर दिया गया और उसे टालमटोल किया जाने लगा।
कुछ समय बाद बैंक की ओर से सूचना मिलने पर पीड़ित को पता चला कि उसके नाम से खुले खाते में संदिग्ध ट्रांजैक्शन हो रहे हैं। जब उसने बैंक जाकर जानकारी ली तो सामने आया कि खाते के जरिए करीब ₹3 करोड़ का लेनदेन किया गया है। यह जानकारी सामने आते ही उसके होश उड़ गए।
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पीड़ित ने जब आरोपियों से पूछताछ की कोशिश की तो उसे धमकाया गया। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। तिवारीपुर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो पता चला कि यह एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा है, जिसमें म्यूल खातों का इस्तेमाल कर अवैध रूप से पैसे ट्रांसफर किए जा रहे थे।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी खातों को अपने कब्जे में लेकर उन्हें साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। हर ट्रांजैक्शन पर उन्हें कमीशन के रूप में कुछ हजार रुपये दिए जाते थे। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क अन्य राज्यों तक फैला हुआ है और कई लोग इसमें शामिल हो सकते हैं।
दिल्ली और बेंगलुरु से सबसे अधिक ट्रांजैक्शन आने की पुष्टि हुई है, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि ऑनलाइन गेमिंग, फर्जी निवेश और डिजिटल फ्रॉड से जुड़ा पैसा इन खातों के जरिए घुमाया गया है। पुलिस अब इन ट्रांजैक्शन की गहन फॉरेंसिक जांच कर रही है।
इस पूरे मामले पर साइबर अपराध विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि “म्यूल अकाउंट साइबर अपराध की रीढ़ बन चुके हैं। ठग गरीब और बेरोजगार लोगों को मामूली लालच देकर उनके बैंक खातों का दुरुपयोग करते हैं, जिससे असली अपराधी हमेशा पर्दे के पीछे रहते हैं। जागरूकता और बैंक स्तर पर सख्त KYC जांच इस समस्या को रोकने के लिए बेहद जरूरी है।”
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल को भी जांच में शामिल किया गया है।
