गोरखपुर/लखनऊ। पूर्वांचल में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें 50 से अधिक “म्यूल खातों” का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की अवैध रकम को ठिकाने लगाया गया। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह गोरखपुर, लखनऊ और चित्रकूट तक फैला हुआ था और बेहद संगठित तरीके से साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के सरगना तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।
जांच के अनुसार, गिरोह का संचालन एक सुनियोजित रणनीति के तहत किया जा रहा था। आरोपी लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को ट्रांसफर करने और उसे अलग-अलग जगहों पर घुमाने में किया जाता था। ऐसे खातों को “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है, जो अवैध लेनदेन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में रवि सिंह उर्फ रामदास, ऋतुराज यादव, दिव्यांशु सिंह उर्फ साहिल, अनुज विश्वकर्मा उर्फ शुभम, ओमकार अग्रहरि उर्फ अजीत, राहुल सिंह और आदित्य चौधरी उर्फ सौरभ शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ आरोपी अलग-अलग जिलों में रहकर नेटवर्क को संचालित कर रहे थे, जिससे गिरोह की पहुंच और विस्तार का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि पूरे गिरोह का संचालन ओमकार अग्रहरि उर्फ अजीत और ऋतुराज यादव के निर्देश पर किया जा रहा था। ये दोनों अन्य सदस्यों के जरिए लोगों को झांसे में लेकर खाते खुलवाते थे। खाता खुलने के बाद पासबुक, एटीएम कार्ड और चेकबुक अपने कब्जे में ले लिए जाते थे, जिससे खाताधारक का उस खाते पर कोई नियंत्रण नहीं रह जाता था।
जांच में एक अहम नाम “जॉन बाबा” का भी सामने आया है, जिसे इस पूरे रैकेट का तकनीकी संचालक माना जा रहा है। आरोप है कि वही साइबर ठगी से आई रकम को इन म्यूल खातों में ट्रांसफर करता था और फिर अलग-अलग माध्यमों से निकालकर आगे भेजता था। पुलिस के अनुसार, यह व्यक्ति नेटवर्क की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है और इसकी तलाश तेज कर दी गई है।
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पुलिस को अब तक जिन खातों की जानकारी मिली है, उनमें करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन के साक्ष्य सामने आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह रकम विभिन्न साइबर अपराधों से जुड़ी हो सकती है, जिनमें ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी कॉल और डिजिटल पेमेंट से जुड़े घोटाले शामिल हैं। इन खातों के जरिए पैसे को इतनी तेजी से घुमाया जाता था कि उसकी ट्रैकिंग करना चुनौतीपूर्ण हो जाता था।
जांच एजेंसियां अब इन सभी खातों से जुड़े लेनदेन की गहन जांच कर रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इन खातों के जरिए किन-किन लोगों को भुगतान किया गया और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्य कौन हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, म्यूल अकाउंट आज साइबर अपराध का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “साइबर अपराधी सीधे अपने नाम से लेनदेन करने के बजाय आम लोगों के खातों का इस्तेमाल करते हैं। यह सोशल इंजीनियरिंग का हिस्सा है, जिसमें लालच या झांसे के जरिए लोगों को अनजाने में अपराध का हिस्सा बना दिया जाता है।”
यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि लोगों को अपने बैंक खातों और व्यक्तिगत दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी प्रकार के लालच, कमीशन या सरकारी योजना के नाम पर अपना खाता खुलवाना या किसी को सौंपना गंभीर आर्थिक और कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है।
फिलहाल पुलिस गिरोह के सरगना और अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर लिया जाएगा। यह कार्रवाई न केवल साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बड़ा कदम है, बल्कि आम लोगों के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी है कि डिजिटल युग में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
