उपभोक्ता आयोग ने last-minute flight cancellation मामले में Go First को passenger को refund और compensation देने का आदेश दिया।

लास्ट-मिनट फ्लाइट कैंसिलेशन पर एयरलाइन को झटका: उपभोक्ता आयोग ने ₹63,000 मुआवजा देने का दिया आदेश

Team The420
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नई दिल्ली। अंतिम समय पर फ्लाइट कैंसिल करना एयरलाइन को भारी पड़ गया है। एक उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए एयरलाइन कंपनी को आदेश दिया है कि वह प्रभावित यात्री को कुल ₹63,000 का मुआवजा अदा करे। आयोग ने कहा कि बिना उचित कारण और समय पर सूचना दिए उड़ान रद्द करना उपभोक्ता सेवा में गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है, जिससे यात्रियों को न केवल आर्थिक नुकसान होता है बल्कि मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ती है।

मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने निर्धारित यात्रा कार्यक्रम के तहत टिकट बुक किया था और वह अपनी यात्रा को लेकर पूरी तरह तैयार था। लेकिन यात्रा के ठीक पहले एयरलाइन की ओर से अचानक फ्लाइट कैंसिल कर दी गई। इस अंतिम समय की सूचना के कारण यात्री को वैकल्पिक व्यवस्था करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ा।

यात्री ने आरोप लगाया कि एयरलाइन ने न तो समय पर उचित कारण बताया और न ही वैकल्पिक उड़ान या पर्याप्त सहायता उपलब्ध कराई। मजबूरी में उसे महंगे दाम पर दूसरी यात्रा व्यवस्था करनी पड़ी, जिससे उसका वित्तीय बोझ बढ़ गया। इसके बाद उसने उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत शिकायत दर्ज कराई।

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सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग ने पाया कि एयरलाइन की ओर से सेवा में स्पष्ट कमी और लापरवाही बरती गई है। आयोग ने कहा कि विमानन सेवा एक अत्यधिक जिम्मेदार क्षेत्र है, जहां यात्रियों की योजनाएं और समय दोनों अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में अंतिम समय पर बिना ठोस कारण के उड़ान रद्द करना उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।

आयोग ने यह भी टिप्पणी की कि यात्रियों को समय पर सूचना देना और वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराना एयरलाइन की मूल जिम्मेदारी है। इस मामले में एयरलाइन द्वारा न तो पर्याप्त सूचना दी गई और न ही किसी प्रकार की प्रभावी सहायता प्रदान की गई, जिससे यात्री को अनावश्यक नुकसान झेलना पड़ा।

निर्णय में आयोग ने एयरलाइन को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को ₹63,000 का मुआवजा दे, जिसमें यात्रा के अतिरिक्त खर्च और मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजा शामिल है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उपभोक्ता को हुई असुविधा को केवल वित्तीय नुकसान के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसे सेवा में गंभीर चूक माना जाएगा।

इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह विमानन सेवाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के निर्णय भविष्य में एयरलाइनों को अपनी सेवाओं को अधिक जिम्मेदारी से संचालित करने के लिए प्रेरित करेंगे।

उपभोक्ता कानून विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी से जुड़े मामलों में लगातार वृद्धि देखी गई है। कई मामलों में यात्रियों को समय पर जानकारी नहीं मिलती, जिससे उनकी यात्रा योजनाएं प्रभावित होती हैं और उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत यात्रियों को यह अधिकार प्राप्त है कि उन्हें उचित सेवा मिले और किसी भी तरह की लापरवाही की स्थिति में मुआवजा दिया जाए। ऐसे मामलों में आयोग का रुख लगातार यात्रियों के पक्ष में सख्त होता जा रहा है।

फिलहाल इस फैसले के बाद विमानन क्षेत्र में यह संदेश गया है कि सेवा में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बिना परिणाम के नहीं रहेगी। यात्रियों के अधिकारों की अनदेखी करने पर कंपनियों को आर्थिक दंड और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

यह मामला एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि आधुनिक समय में उपभोक्ता जागरूकता बढ़ रही है और सेवा प्रदाताओं को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक सजग रहना होगा।

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