झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित सॉल्वर गैंग के खुलासे के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और आरोपियों पर कार्रवाई हुई है।

“बिजली विभाग में ‘करंट’ घोटाला: 9 ट्रांसफार्मर गायब, जांच में एसडीओ पर शिकंजा”

Roopa
By Roopa
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गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में बिजली विभाग से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने न केवल विभागीय कार्यप्रणाली बल्कि पूरे निगरानी तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्युत वितरण खंड प्रथम जंगीपुर के अंतर्गत उपखंड कार्यालय पारा में तैनात उपखंड अधिकारी प्रमोद यादव पर नौ ट्रांसफार्मरों की चोरी के मामले में संलिप्तता पाए जाने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। जांच में सामने आ रहे तथ्यों ने संकेत दिए हैं कि यह मामला केवल चोरी तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

इस पूरे मामले की शुरुआत नौनहरा थाने में दर्ज कराए गए मुकदमे से हुई, जहां ट्रांसफार्मर चोरी की शिकायत सामने आई थी। शिकायत मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो संविदा कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान अहम सुराग मिले, जिनके आधार पर तीन चोरी हुए ट्रांसफार्मर बरामद किए गए। इस बरामदगी के बाद मामला और गंभीर हो गया और विभागीय मिलीभगत की आशंका मजबूत हो गई।

जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि इस पूरे प्रकरण में केवल निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी शक के दायरे में हैं। वाराणसी जोन स्तर पर की गई जांच में उपखंड अधिकारी प्रमोद यादव की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। उनके कार्यकाल के दौरान क्षेत्र से कुल नौ ट्रांसफार्मर गायब हो गए, जो किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं मानी जा रही। इससे विभागीय निगरानी प्रणाली और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

इस प्रकरण में दो संविदा लाइनमैन—रमेश राम और शिवकुमार—को भी दोषी पाया गया है। दोनों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है। सूत्रों के अनुसार, इन कर्मचारियों की निशानदेही पर ही चोरी किए गए ट्रांसफार्मरों का सुराग मिला, जिससे जांच एजेंसियों को पूरे नेटवर्क को समझने में मदद मिली। माना जा रहा है कि इन कर्मचारियों ने चोरी की योजना को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभाई।

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बताया जा रहा है कि ट्रांसफार्मरों के गायब होने की सूचना पहले ही विभागीय स्तर पर दी जा चुकी थी। तत्कालीन अवर अभियंता ने इस संबंध में अपने वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया था और पुलिस को भी लिखित शिकायत दी थी। इसके बावजूद लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे विभागीय लापरवाही और संभावित मिलीभगत पर सवाल और गहरे हो गए हैं। यह भी जांच का विषय बन गया है कि आखिर इतनी बड़ी घटना को समय रहते गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब हाल ही में ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा गाजीपुर दौरे पर पहुंचे और उपकेंद्र महरौर का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई तकनीकी और प्रशासनिक खामियां सामने आईं, जिसके चलते संबंधित अवर अभियंता को निलंबित कर दिया गया। इसी दौरान ट्रांसफार्मर चोरी का मामला भी मंत्री के संज्ञान में आया, जिसके बाद जांच प्रक्रिया को तेज कर दिया गया।

जिलाधिकारी स्तर पर भी इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर संयुक्त जांच शुरू की गई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पूरी रिपोर्ट उच्च प्रबंधन को भेज दी गई है, जहां से उपखंड अधिकारी प्रमोद यादव के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

यह मामला केवल ट्रांसफार्मर चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि यदि निगरानी और जवाबदेही की प्रणाली कमजोर हो, तो सरकारी संसाधनों का किस तरह दुरुपयोग संभव है। फिलहाल, जांच जारी है और विभागीय स्तर पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

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