“5 एटीएम में कम डाली गई नकदी, ऑडिट में खुला फर्जीवाड़ा; नोटिस के बाद भी नहीं लौटाए पूरे पैसे, अब जांच तेज”

“एटीएम में ‘कैश लोडिंग’ का खेल: ₹30.95 लाख का गबन, मास्टर फ्रेंचाइजी समेत तीन पर केस”

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By Roopa
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गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में एटीएम संचालन से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जहां नकदी लोडिंग के दौरान करीब ₹30.95 लाख के गबन का आरोप लगा है। मामले में कंपनी की शिकायत पर मास्टर फ्रेंचाइजी समेत तीन आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक न्यास भंग की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में यह मामला सुनियोजित तरीके से कंपनी को गलत जानकारी देकर रकम हड़पने का प्रतीत हो रहा है।

यह मामला हिताची पेमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जो भारतीय रिजर्व बैंक से अधिकृत संस्था है और विभिन्न बैंकों के एटीएम व कैश डिपॉजिट मशीनों का संचालन करती है। कंपनी ने गाजीपुर जिले में एटीएम संचालन के लिए दिलदारनगर निवासी अमित कुमार जायसवाल को मास्टर फ्रेंचाइजी नियुक्त किया था। बाद में उनके अनुरोध पर उनके पुत्र हर्ष राज को भी फ्रेंचाइजी अनुबंध में शामिल किया गया।

कंपनी के अनुसार, जिले के अलग-अलग स्थानों पर स्थापित पांच एटीएम मशीनों में नकदी लोड करने की जिम्मेदारी अमित कुमार जायसवाल, उनके पुत्र हर्ष राज और उनके कर्मचारी विश्वजीत राज को सौंपी गई थी। यह जिम्मेदारी बेहद संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि इसमें प्रतिदिन लाखों रुपये की नकदी का प्रबंधन शामिल होता है।

घोटाले का खुलासा तब हुआ जब कंपनी ने एटीएम के स्विच डेटा और लेखा विवरण का मिलान कराया। जांच में सामने आया कि एटीएम मशीनों में जितनी नकदी डाली जानी चाहिए थी, उससे कुल ₹43,37,600 कम रकम जमा की गई। यह अंतर सामने आते ही कंपनी ने संबंधित फ्रेंचाइजी से जवाब तलब किया और कई बार नोटिस भेजे।

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कंपनी का आरोप है कि नोटिस के बाद आरोपियों ने आंशिक रूप से रकम लौटाने की कोशिश की। 18 नवंबर 2025 को ₹8,09,700 और 19 नवंबर 2025 को ₹4,32,200 जमा किए गए। हालांकि इसके बावजूद ₹30,95,700 की बड़ी राशि अभी भी बकाया रही, जिसे आरोपियों ने वापस नहीं किया। कंपनी का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया गबन है।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने नकदी लोडिंग से जुड़ी गलत जानकारी देकर कंपनी को भ्रमित किया और रिकॉर्ड में हेरफेर कर वास्तविक स्थिति छिपाने की कोशिश की। इस तरह का फर्जीवाड़ा एटीएम संचालन प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर बैंकिंग सिस्टम से जुड़ी नकदी का दुरुपयोग शामिल है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए कंपनी के सहायक प्रबंधक ने उच्च अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद संबंधित थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस गबन में और भी लोग शामिल हैं।

जांच एजेंसियां एटीएम के तकनीकी डेटा, नकदी ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही हैं। इसके साथ ही आरोपियों से पूछताछ के जरिए यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गबन की गई राशि का उपयोग कहां और कैसे किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि एटीएम संचालन से जुड़े ऐसे मामलों में आंतरिक निगरानी तंत्र की मजबूती बेहद जरूरी है। कैश हैंडलिंग से जुड़े सिस्टम में छोटी सी चूक भी बड़े वित्तीय नुकसान का कारण बन सकती है। इस तरह की घटनाएं यह भी संकेत देती हैं कि फ्रेंचाइजी मॉडल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है।

यह मामला न केवल एक कंपनी के वित्तीय नुकसान का है, बल्कि यह बैंकिंग और एटीएम नेटवर्क की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी एक चेतावनी है। तेजी से बढ़ते डिजिटल और कैश नेटवर्क के बीच अब निगरानी, ऑडिट और जवाबदेही के मानकों को और सख्त करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

फिलहाल, पुलिस की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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