₹5 करोड़ फीस घोटाले के बाद यूपी सरकार की सख्ती; पिछले पांच वर्षों के वित्तीय लेनदेन की होगी व्यापक जांच, कई और नाम आने के संकेत

‘फीस से फंड तक खेल’: GBU में 5 साल की कमाई पर बड़ा ऑडिट, घोटाले की परतें खुलने शुरू

Roopa
By Roopa
5 Min Read

ग्रेटर नोएडा: गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में सामने आए ₹5 करोड़ के फीस घोटाले के बाद अब जांच का दायरा तेजी से बढ़ा दिया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले पांच वर्षों में छात्रों से वसूली गई फीस का व्यापक ऑडिट शुरू करा दिया है। इस फैसले को घोटाले की जड़ों तक पहुंचने और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। शुरुआती संकेत यह भी दे रहे हैं कि यह मामला केवल ₹5 करोड़ तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि जांच आगे बढ़ने के साथ घोटाले का वास्तविक आकार और बड़ा हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय में फीस से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। कई छात्रों ने आरोप लगाया था कि फीस जमा करने के बावजूद लेखा विभाग की ओर से उनकी फीस रिकॉर्ड में दर्ज नहीं दिखाई जा रही थी। कुछ छात्रों ने फीस जमा करने के प्रमाण भी प्रस्तुत किए, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई। इन शिकायतों के आधार पर सत्र 2024-25 के लिए एक आंतरिक जांच समिति का गठन किया गया था।

इस समिति की रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी और संभावित गबन के संकेत मिले। जांच में सामने आया कि कई मामलों में फीस की राशि सॉफ्टवेयर सिस्टम में तो दर्ज की गई, लेकिन वह विश्वविद्यालय के आधिकारिक बैंक खातों तक नहीं पहुंची। इस विसंगति ने पूरे मामले को एक संगठित वित्तीय अपराध के रूप में सामने ला दिया। इसके बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई, जिनमें लेखा विभाग से जुड़े कर्मचारी और अन्य संबंधित व्यक्ति शामिल हैं।

अब राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय कमेटी इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। ऑडिट के तहत पिछले पांच वर्षों के सभी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और सॉफ्टवेयर एंट्री का मिलान किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यह प्रक्रिया कई नई विसंगतियों और संदिग्ध लेनदेन को उजागर कर सकती है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि किस स्तर पर सिस्टम में गड़बड़ी की गई और किन लोगों को इसका लाभ मिला।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

इस पूरे विवाद की शुरुआत 30 दिसंबर को हुई थी, जब समाजवादी छात्र सभा के अध्यक्ष मोहित नागर ने विश्वविद्यालय में कथित भ्रष्टाचार और फीस घोटाले को लेकर खुलकर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि विश्वविद्यालय में लंबे समय से वित्तीय अनियमितताओं का खेल चल रहा है और जिम्मेदारों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि फीस से जुड़े मामलों में करीब ₹25 करोड़ तक की रिकवरी का मुद्दा सामने आया है, जिसने जांच को और गंभीर बना दिया।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रों की शिकायतों के बाद ही इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर लिया गया और जांच शुरू की गई। आंतरिक ऑडिट में सामने आए तथ्यों को शासन के संज्ञान में लाया गया, जिसके बाद राज्य स्तर पर विस्तृत जांच का निर्णय लिया गया। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में और अनियमितताएं सामने आती हैं, तो अतिरिक्त प्राथमिकी भी दर्ज की जा सकती हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

गौरतलब है कि गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में देश और विदेश से बड़ी संख्या में छात्र शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। यहां प्रबंधन, इंजीनियरिंग, बायोटेक्नोलॉजी, सूचना प्रौद्योगिकी, विधि और सामाजिक विज्ञान जैसे कई प्रमुख पाठ्यक्रम संचालित होते हैं। ऐसे में इस तरह का वित्तीय घोटाला न केवल संस्थान की साख पर असर डालता है, बल्कि छात्रों के विश्वास को भी झटका देता है।

फिलहाल, जांच प्रक्रिया जारी है और ऑडिट रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे पुराने रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे, इस घोटाले से जुड़े और भी तथ्य सामने आ सकते हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह वित्तीय अनियमितता कितने बड़े स्तर पर फैली हुई थी और इसमें कितने लोग शामिल थे।

हमसे जुड़ें

Share This Article