फरीदाबाद पुलिस ने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी (एमएनसी) में कार्यरत और ₹3.5 लाख मासिक वेतन पाने वाले आईटी इंजीनियर को कथित रूप से जाली भारतीय मुद्रा छापने के आरोप में गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान पुलिस ने होटल के एक कमरे से लैपटॉप, प्रिंटर, विशेष प्रिंटिंग पेपर, ₹500 का एक जाली नोट, ₹100 के 10 जाली नोट तथा नकली मुद्रा तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री बरामद की है।
पुलिस के अनुसार, सूरजकुंड थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि होटल सरोवर पोर्टिको के एक कमरे में नकली भारतीय मुद्रा तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला संदिग्ध सामान रखा गया है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने होटल में छापेमारी की। हालांकि, पुलिस के पहुंचने तक कमरे में कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। इसके बाद होटल प्रबंधन की मौजूदगी में कमरे की तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान पुलिस ने एक लैपटॉप, एक प्रिंटर, नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला विशेष कागज, ₹500 का एक जाली नोट, ₹100 के 10 जाली नोट तथा अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की। बरामद सभी सामान को जब्त कर फॉरेंसिक और तकनीकी जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
पुलिस ने बताया कि होटल के रजिस्टर और बुकिंग रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि संबंधित कमरा विनायक झा, निवासी सेक्टर-17, फरीदाबाद के नाम से बुक कराया गया था। होटल में जमा कराए गए पहचान दस्तावेजों के आधार पर पुलिस उसकी पहचान और पते तक पहुंची तथा उसके घर पर छापेमारी कर उसे हिरासत में लिया।
पूछताछ के दौरान विनायक झा होटल के कमरे और वहां से बरामद सामान के संबंध में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद क्राइम ब्रांच एनआईटी ने उसे गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि आरोपी उच्च शिक्षित है और आर्थिक रूप से संपन्न परिवार से संबंध रखता है। पुलिस के अनुसार, उसने बेंगलुरु के एक प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ाई की है और वर्तमान में नोएडा स्थित एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) इंजीनियर के पद पर कार्यरत है, जहां उसे लगभग ₹3.5 लाख प्रति माह वेतन मिलता है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी के पिता एक सरकारी विभाग में कार्यरत हैं, जबकि उसकी मां भी एक सरकारी संस्थान में वरिष्ठ पद पर तैनात हैं।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या किसी बड़े जाली नोट गिरोह का हिस्सा था। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और प्रिंटिंग सामग्री की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है तथा इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं।
