फरीदाबाद साइबर थाना एनआईटी पुलिस ने क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर ठगी करने वाले कथित फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है।

क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर 500 लोगों से ठगी, फरीदाबाद में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़

Team The420
5 Min Read

फरीदाबाद: हरियाणा के फरीदाबाद में साइबर थाना एनआईटी पुलिस ने एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए सरगना समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने और बैंकिंग सेवाओं से जुड़े दूसरे बहानों का इस्तेमाल कर लोगों से संपर्क करते थे। बातचीत के दौरान वे ग्राहकों से बैंकिंग जानकारी और OTP हासिल कर उनके खातों से रकम निकाल लेते थे। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने करीब 400 से 500 लोगों को ठगी का शिकार बनाने की बात स्वीकार की है।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे और उनकी निशानदेही पर 14 मोबाइल फोन और 14 सिम कार्ड बरामद किए हैं। जांच में सामने आया है कि गिरोह दिल्ली के राजौरी गार्डन स्थित एक होटल से फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर रहा था। पुलिस अब बरामद मोबाइल और सिम कार्ड की तकनीकी जांच के जरिए गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटा रही है।

क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने का झांसा

मामला तब सामने आया जब सीकरी निवासी एक व्यक्ति ने साइबर थाना एनआईटी में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित के अनुसार, 27 जुलाई को उसके मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को क्रेडिट कार्ड सेवा से जुड़ा कर्मचारी बताया और कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा दिया।

FutureCrime Summit 2026 to Unveil Landmark White Paper on Future Policing & Advanced Cyber Forensics

आरोप है कि बातचीत के दौरान ठग ने पीड़ित से OTP हासिल कर लिया। इसके बाद उसके बैंक खाते से ₹65,040 निकाल लिए गए। रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की। मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान पुलिस ने निखिल, आकाश, ध्रुव, सुनील, नितिन और दो महिलाओं को गिरफ्तार किया। पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि ध्रुव गिरोह का सरगना था, जबकि नितिन कॉल सेंटर के लिए मोबाइल फोन, सिम कार्ड और लोगों का डेटा उपलब्ध कराने का काम करता था। अन्य आरोपी कथित तौर पर कॉलर के रूप में लोगों से बातचीत करते थे।

अलग-अलग बहानों से हासिल करते थे OTP

पुलिस के मुताबिक, आरोपी केवल क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने का ही बहाना नहीं बनाते थे। वे बैंकिंग सेवाओं से जुड़े अलग-अलग कारण बताकर ग्राहकों से संपर्क करते और उन्हें विश्वास में लेने की कोशिश करते थे। इसके बाद बैंक खाते, क्रेडिट कार्ड और अन्य वित्तीय जानकारी हासिल की जाती थी।

आरोप है कि गिरोह का मुख्य उद्देश्य OTP या अन्य संवेदनशील जानकारी प्राप्त करना था। जानकारी मिलने के बाद पीड़ितों के खातों से रकम निकाल ली जाती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों के पास संभावित पीड़ितों का डेटा कहां से पहुंचता था और उन्होंने कितने लोगों को कॉल किया था।

ठगी की रकम से खरीदते थे सामान

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर ठगी की रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय ऑनलाइन सामान खरीदने में लगाते थे। इसके बाद खरीदे गए सामान को बाजार में कम कीमत पर बेचकर नकदी या अन्य माध्यमों से रकम को खपाने की कोशिश की जाती थी।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि ऑनलाइन खरीदे गए सामान की सप्लाई कहां की जाती थी और उन्हें बेचने में कौन-कौन लोग मदद करते थे। इस प्रक्रिया से जुड़े बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

दो आरोपियों का पुराना साइबर रिकॉर्ड

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में ध्रुव और नितिन के खिलाफ पहले भी साइबर अपराध से जुड़े मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब उनके पुराने मामलों और मौजूदा गिरोह के बीच संभावित संबंधों की जांच कर रही है।

बरामद 14 मोबाइल फोन और 14 सिम कार्ड जांच में अहम माने जा रहे हैं। इनके जरिए पुलिस कॉल रिकॉर्ड, संपर्कों, डिजिटल लेनदेन और संभावित पीड़ितों से जुड़े सुराग जुटा सकती है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने फर्जी कॉल सेंटर कब से संचालित किया और अब तक कितनी रकम की ठगी की।

फिलहाल सातों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस गिरोह के नेटवर्क, डेटा सप्लाई करने वाले लोगों, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और ठगी की रकम के पूरे लेनदेन की पड़ताल कर रही है। जांच के आधार पर मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

हमसे जुड़ें

Share This Article