चंदौली में फर्जी रेलवे कर्मचारी बनकर SBI से ₹20 लाख का पर्सनल लोन लेने और चार साल तक किस्त न चुकाने का मामला सामने आया है।

फर्जी रेलवे कर्मचारी बनकर SBI से ₹20 लाख का पर्सनल लोन, 4 साल तक नहीं चुकाई एक भी किस्त

Team The420
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चंदौली: उत्तर प्रदेश के चंदौली में बैंक से पर्सनल लोन लेने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कानपुर निवासी विजय कुमार राय ने खुद को रेलवे कर्मचारी बताकर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की आईटीसी मॉल शाखा से ₹20 लाख का पर्सनल लोन हासिल किया। लोन स्वीकृत होने के बाद उसने करीब चार साल तक बैंक की एक भी किस्त जमा नहीं की। बैंक के आंतरिक ऑडिट के दौरान दस्तावेजों और लोन खाते में अनियमितता सामने आने के बाद शाखा प्रबंधन ने पुलिस से शिकायत की।

पुलिस के अनुसार, विजय कुमार राय कानपुर के किदवई नगर क्षेत्र में रहता है। उसने वर्ष 2022 में चंदौली जिला मुख्यालय स्थित SBI की आईटीसी मॉल शाखा में पर्सनल लोन के लिए आवेदन किया था। आवेदन के दौरान उसने कथित तौर पर खुद को रेलवे कर्मचारी बताया और अपनी पहचान तथा नौकरी से संबंधित दस्तावेज बैंक में जमा किए।

वेतन पर्ची समेत कई दस्तावेज लगाए

शिकायत के मुताबिक, लोन आवेदन के साथ विजय ने आधार कार्ड, पैन कार्ड और वेतन पर्ची समेत कई दस्तावेज जमा किए। इन दस्तावेजों के आधार पर बैंक ने लोन प्रक्रिया आगे बढ़ाई। शुरुआती स्तर पर आधार और पैन से संबंधित जानकारी का सत्यापन किए जाने की बात सामने आई है, लेकिन रेलवे में नौकरी और वेतन से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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बैंक रिकॉर्ड के मुताबिक, 15 नवंबर 2022 को ₹20 लाख की लोन राशि विजय के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। इसके बाद बैंक को उम्मीद थी कि निर्धारित शर्तों के अनुसार मासिक किस्तों का भुगतान शुरू होगा। हालांकि, आरोप है कि लोन लेने के बाद विजय ने एक भी किस्त जमा नहीं की।

लोन खाता लंबे समय तक बकाया बना रहा। करीब चार साल बाद बैंक के आंतरिक ऑडिट के दौरान संबंधित खाते की दोबारा जांच हुई। इसी दौरान दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी और लंबे समय से किस्त जमा नहीं होने का मामला सामने आया।

ऑडिट में खुली दस्तावेजों की परत

ऑडिट के बाद बैंक अधिकारियों ने लोन आवेदन से जुड़े दस्तावेजों की दोबारा जांच शुरू की। इस दौरान यह पता लगाने की कोशिश की गई कि आरोपी ने रेलवे कर्मचारी होने के दावे के समर्थन में कौन-कौन से दस्तावेज जमा किए थे और उनकी जांच किस प्रक्रिया के तहत की गई थी।

मामले में बैंक की शुरुआती जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी वेतन पर्ची और अन्य दस्तावेज कहां तैयार कराए गए थे तथा क्या इनके सत्यापन में किसी स्तर पर लापरवाही हुई।

बैंक मैनेजर की शिकायत पर मुकदमा

धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद शाखा प्रबंधक जय कुमार ने विजय कुमार राय के खिलाफ सदर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अब लोन आवेदन में लगाए गए दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, कथित वेतन प्रमाण और रेलवे से संबंधित जानकारी का सत्यापन करेगी। जांच का एक अहम हिस्सा यह भी होगा कि आरोपी ने नौकरी का फर्जी प्रमाण कैसे तैयार कराया और क्या इस प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति या एजेंसी की भूमिका थी।

बैंकिंग प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

मामले ने बैंक की ऋण स्वीकृति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि आरोपी ने वास्तव में फर्जी नौकरी और आय संबंधी दस्तावेजों के आधार पर ₹20 लाख का लोन हासिल किया, तो यह मामला केवल कर्ज नहीं चुकाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दस्तावेजी धोखाधड़ी और बैंक को गलत जानकारी देकर वित्तीय लाभ लेने से भी जुड़ सकता है।

फिलहाल पुलिस आरोपी की ओर से लगाए गए दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि चार साल तक लोन खाते पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और आरोपी ने लोन की रकम का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया। जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

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