रायपुर में फर्जी लोन दिलाने के नाम पर दस्तावेज लेकर पीड़ित के नाम पर ₹27.5 लाख का कर्ज उठाकर ठगी करने वाले आरोपी गिरफ्तार

फरीदाबाद में ₹4 करोड़ का साइबर फ्रॉड: बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से खुला म्यूल अकाउंट नेटवर्क

Team The420
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फरीदाबाद। साइबर ठगी के एक बड़े मामले में फरीदाबाद पुलिस ने दो बैंक कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने निवेश के नाम पर चल रहे ₹4 करोड़ के फ्रॉड में ठगों को सीधा सपोर्ट दिया। जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपियों ने साइबर अपराधियों के लिए म्यूल बैंक खाते खुलवाने में मदद की, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को अलग-अलग चैनलों में ट्रांसफर करने के लिए किया गया।

पुलिस के अनुसार यह पूरा मामला शेयर बाजार में निवेश और तेज मुनाफे का लालच देकर लोगों को फंसाने से जुड़ा हुआ है। पीड़ितों को पहले छोटे-छोटे रिटर्न दिखाकर भरोसा दिलाया गया और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करवाई गई। जैसे ही रकम बढ़ी, उसे अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराकर निकाल लिया गया।

जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क में बैंक के भीतर से ही सहयोग मिल रहा था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभम और कमल कांत के रूप में हुई है, जो एक बैंक शाखा में कार्यरत थे। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी या संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर कई बैंक खाते खुलवाए और उन्हें साइबर ठगों को उपलब्ध कराया।

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पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को तेजी से अलग-अलग लेयर में घुमाने के लिए किया जाता था ताकि पैसे के स्रोत को ट्रेस करना मुश्किल हो जाए। शुरुआती अनुमान के अनुसार, इन खातों के जरिए लगभग ₹4 करोड़ की साइबर ठगी को अंजाम दिया गया।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को हर खाते के बदले कमीशन दिया जाता था। यह रकम सीधे साइबर गिरोह से मिलती थी, जो देश के बाहर बैठे नेटवर्क से संचालित हो रहा था। इन खातों का इस्तेमाल कई अलग-अलग राज्यों में दर्ज साइबर फ्रॉड मामलों में भी किया गया है।

पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने बैंकिंग प्रक्रियाओं की आड़ में ऐसे खाते खोले जिनकी निगरानी सामान्य जांच में पकड़ में नहीं आती थी। कई मामलों में KYC दस्तावेजों की सत्यता पर भी सवाल उठे हैं, जिसकी अलग से जांच की जा रही है।

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर तीन दिन के रिमांड पर लिया है। इस दौरान उनसे पूरे नेटवर्क, अन्य सहयोगियों और पैसे के अंतिम ट्रांसफर चैनलों के बारे में पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस पूरे मामले में बैंक स्तर पर और भी लोग शामिल हो सकते हैं।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में बैंकिंग सिस्टम के अंदर से सहयोग मिलना खतरे की गंभीरता को और बढ़ा देता है। इससे ठगों को न केवल आसान अकाउंट मिलते हैं, बल्कि उन्हें ट्रांजैक्शन को छिपाने में भी मदद मिलती है।

इस मामले पर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने कहा कि “आज के समय में साइबर अपराध केवल बाहरी हमलावरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बैंकिंग और फाइनेंशियल सिस्टम के भीतर मौजूद कमजोर कड़ियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। म्यूल अकाउंट इस पूरे इकोसिस्टम की सबसे बड़ी चुनौती बन चुके हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के फ्रॉड में सबसे पहले भरोसा बनाया जाता है, फिर छोटे लाभ दिखाकर निवेश बढ़ाया जाता है और अंत में पूरी रकम को कई परतों में ट्रांसफर कर गायब कर दिया जाता है।

फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य खातों और संदिग्ध ट्रांजैक्शन की गहराई से जांच कर रही है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट का हिस्सा हो सकता है, जिसमें कई बैंक कर्मचारी और फाइनेंशियल एजेंट शामिल हो सकते हैं।

अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि पूरे मनी फ्लो और डिजिटल ट्रेल की जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।

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