अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों (Indian Diaspora) को निशाना बनाकर भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों का प्रतिरूपण (Impersonation) करने वाले साइबर ठगों की गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। भारतीय राजनयिक मिशनों के अनुसार, हर सप्ताह ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें अपराधी भारतीय दूतावास के अधिकारियों के नाम पर फोन कर लोगों से धन उगाही, यात्रा दस्तावेजों में सहायता, कथित कानूनी कार्रवाई या भारत में उनके नाम से अपराध होने का झांसा देकर ठगी की कोशिश करते हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, ठग अमेरिकी एरिया कोड वाले स्पूफ (Spoofed) फोन नंबरों का इस्तेमाल कर खुद को भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास का अधिकारी बताते हैं। कई मामलों में पीड़ितों को बताया जाता है कि उनके नाम पर भारत में जारी मोबाइल नंबर का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों, वित्तीय अपराध या अन्य अवैध कार्यों में हुआ है। इसके बाद कथित जांच, क्लियरेंस या दस्तावेज जारी करने के नाम पर धन की मांग की जाती है।
भारतीय दूतावास और विभिन्न भारतीय वाणिज्य दूतावासों ने इस बढ़ते खतरे को देखते हुए सार्वजनिक एडवाइजरी जारी की है और भारतीय समुदाय से किसी भी संदिग्ध कॉल पर सतर्क रहने की अपील की है। मिशनों ने स्पष्ट किया है कि उनके अधिकारी कभी भी फोन पर धन, बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, पासपोर्ट विवरण या अन्य संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगते।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेषकर रेडिट पर, कई भारतीय-अमेरिकियों ने ऐसे कॉल मिलने के अनुभव साझा किए हैं। कुछ मामलों में कॉल करने वालों ने स्वयं को सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास का अधिकारी बताया, जबकि अन्य मामलों में खुद को विदेश मंत्रालय या दिल्ली पुलिस से जुड़ा अधिकारी बताकर लोगों को कथित जांच में सहयोग करने के लिए दबाव बनाया गया। कई पीड़ितों ने बताया कि कॉल करने वालों के पास उनका नाम और मोबाइल नंबर जैसी वास्तविक जानकारी होने से शुरुआत में उन्हें कॉल विश्वसनीय लगी।
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका से प्राप्त ऐसे प्रतिरूपण और संबंधित धोखाधड़ी के मामलों की संख्या 2024 में 8 से बढ़कर 2025 में 613 हो गई, जो इस प्रकार के साइबर अपराधों में तेज वृद्धि को दर्शाती है।
भारतीय दूतावास ने कहा है कि वह अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर ऐसे मामलों की जांच और रिपोर्टिंग कर रहा है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि यदि उन्हें इस प्रकार की कोई कॉल प्राप्त होती है तो वे तत्काल स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों और निकटतम भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास को इसकी सूचना दें।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि सरकारी एजेंसियों, दूतावासों और कानून प्रवर्तन अधिकारियों का प्रतिरूपण आज अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क की सबसे प्रभावी सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों में से एक बन चुका है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), कॉलर आईडी स्पूफिंग और वॉयस क्लोनिंग जैसी तकनीकों ने ऐसे धोखाधड़ी नेटवर्क को और अधिक विश्वसनीय बना दिया है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम पर आने वाले कॉल पर घबराकर कोई भुगतान न करें, बल्कि संबंधित संस्था के आधिकारिक संपर्क माध्यम से स्वतंत्र रूप से जानकारी की पुष्टि करें।
