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नौ साल तक चला अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क बेनकाब: रूसी कंपनियों की फर्जी वेबसाइट बनाकर विदेशी कारोबारियों से एडवांस पेमेंट की ठगी

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली: साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने नौ वर्षों से अधिक समय तक सक्रिय रहे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसने रूस की प्रमुख कंपनियों की फर्जी वेबसाइटें बनाकर दुनिया भर की कंपनियों से करोड़ों रुपये की एडवांस पेमेंट ठगी। साइबर सुरक्षा कंपनी F6 की रिपोर्ट के अनुसार, यह अभियान वर्ष 2017 से संचालित हो रहा था और इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने वाली कंपनियों को अस्तित्वहीन वस्तुओं के नाम पर भुगतान करने के लिए धोखे में डालना था।

रिपोर्ट के अनुसार, साइबर अपराधियों ने रूस की उर्वरक निर्माता कंपनियों, पेट्रोकेमिकल उद्योगों, धातुकर्म संयंत्रों, लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों और बैंकों की वेबसाइटों की लगभग हूबहू प्रतियां तैयार कीं। इन फर्जी वेबसाइटों पर मूल वेबसाइट की अधिकांश सामग्री कॉपी की गई, लेकिन संपर्क विवरण, ईमेल पते और बैंक खाते बदल दिए गए ताकि भुगतान सीधे साइबर अपराधियों तक पहुंचे। कई मामलों में अपराधियों ने असली डोमेन से मिलते-जुलते डोमेन नाम भी पंजीकृत किए। ये वेबसाइटें अंग्रेजी, फ्रेंच, अरबी और रूसी भाषाओं में उपलब्ध थीं, जिससे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों को आसानी से निशाना बनाया जा सके।

जांच में सामने आया कि यह अभियान मुख्य रूप से कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिपेंडेंट स्टेट्स (CIS) देशों तथा अंतरराष्ट्रीय बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) व्यापार से जुड़ी कंपनियों पर केंद्रित था। अपराधी पहले फ़िशिंग ईमेल, कोल्ड कॉल और फर्जी कॉर्पोरेट वेबसाइटों के माध्यम से संभावित ग्राहकों से संपर्क करते थे। इसके बाद वे नकली सहायक कंपनियों के नाम पर व्यावसायिक प्रस्ताव, अनुबंध और चालान भेजते थे, जिनमें दिए गए बैंक खाते वास्तव में अपराधियों के नियंत्रण में होते थे। ग्राहक जब अग्रिम भुगतान कर देते थे तो उन्हें कभी कोई सामान प्राप्त नहीं होता था।

शोधकर्ताओं ने एक ऐसे मामले का भी उल्लेख किया जिसमें अप्रैल 2025 में अज़रबैजान की एक कंपनी लगभग 1.5 लाख अमेरिकी डॉलर की धोखाधड़ी का शिकार हुई। कंपनी ने सामान की आपूर्ति के लिए अग्रिम भुगतान किया था, लेकिन बाद में पता चला कि पूरा लेनदेन फर्जी वेबसाइट और नकली बैंक खाते के जरिए संचालित किया गया था।

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जांच एजेंसी F6 ने लगभग 100 फर्जी डोमेन की पहचान की है, जो विभिन्न प्रतिष्ठित रूसी कंपनियों का प्रतिरूप बनाकर संचालित किए जा रहे थे। तकनीकी विश्लेषण में कई वेबसाइटों के बीच समान IP पते, DNS रिकॉर्ड और पंजीकरण संबंधी जानकारी मिली, जिससे संकेत मिलता है कि यह पूरी गतिविधि एक ही संगठित साइबर अपराध नेटवर्क द्वारा संचालित की जा रही थी।

रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान की शुरुआत 2017 में सामने आई थी, जब एक रूसी रासायनिक कंपनी को किसानों के फोन आने लगे कि उन्होंने उर्वरक के लिए अग्रिम भुगतान कर दिया है, लेकिन सामान नहीं मिला। जांच में पता चला कि साइबर अपराधियों ने कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट की लगभग समान प्रति तैयार कर ली थी। उन्होंने कंपनी के लेटरहेड पर नकली व्यावसायिक प्रस्ताव और अनुबंध भी तैयार किए थे, जिनमें केवल बैंक खाते और संपर्क विवरण बदल दिए गए थे। परिणामस्वरूप ग्राहक ऐसी वस्तुओं के लिए भुगतान करते रहे, जिनका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं था।

सबसे चिंताजनक तथ्य यह रहा कि जब वास्तविक कंपनियों ने अपनी वेबसाइटों पर धोखाधड़ी से संबंधित चेतावनी प्रकाशित की, तब साइबर अपराधियों ने उन चेतावनियों की भी नकल कर उन्हें अपनी फर्जी वेबसाइटों पर प्रकाशित कर दिया। हालांकि, उन्होंने उनमें असली वेबसाइट के स्थान पर अपने फर्जी डोमेन जोड़ दिए, जिससे वेबसाइट और अधिक विश्वसनीय दिखाई देने लगी।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में ब्रांड इम्पर्सनेशन और फर्जी कॉर्पोरेट वेबसाइटों के जरिए होने वाली धोखाधड़ी तेजी से बढ़ रही है। उनके अनुसार, साइबर अपराधी केवल वेबसाइट ही नहीं, बल्कि ईमेल, अनुबंध, चालान और बैंकिंग दस्तावेज भी इतनी पेशेवर तरीके से तैयार करते हैं कि अनुभवी कारोबारी भी धोखा खा सकते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी विदेशी आपूर्तिकर्ता को अग्रिम भुगतान करने से पहले उसकी वेबसाइट, डोमेन पंजीकरण, बैंक खाते, आधिकारिक ईमेल और संपर्क विवरण की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अवश्य करनी चाहिए।

F6 ने व्यवसायों को सलाह दी है कि वे किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदार की वैधता सरकारी व्यापार रजिस्ट्रियों और विश्वसनीय स्रोतों से जांचें, भुगतान से पहले बैंक खाते की पुष्टि करें, वेबसाइट के डोमेन और उसके पंजीकरण की तारीख की जांच करें तथा केवल आधिकारिक संपर्क माध्यमों से ही वित्तीय लेनदेन करें। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते वैश्विक साइबर खतरों के बीच ऐसी सतर्कता ही संगठित ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

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