बीजिंग: चीन के रियल एस्टेट सेक्टर को झकझोर देने वाले एवरग्रांडे संकट में बड़ा मोड़ आ गया है। Hui Ka Yan, जो कभी एशिया के सबसे प्रभावशाली और अमीर कारोबारियों में शुमार थे, ने अदालत में धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े गंभीर आरोपों को स्वीकार कर लिया है। इस कबूलनामे ने न सिर्फ उनके कारोबारी साम्राज्य के पतन पर मुहर लगा दी है, बल्कि चीन की आर्थिक व्यवस्था पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
अदालती सुनवाई के दौरान China Evergrande Group के संस्थापक ने फंड जुटाने में गड़बड़ी, रिश्वतखोरी और निवेशकों को गुमराह करने जैसे आरोपों को स्वीकार किया। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी और उसके शीर्ष प्रबंधन पर लंबे समय से अवैध रूप से पूंजी जुटाने, गलत वित्तीय आंकड़े पेश करने और निवेशकों को भ्रमित करने के आरोप लगे थे। संक्षिप्त सुनवाई के बाद मामला अब सजा के चरण में पहुंच गया है।
एवरग्रांडे का संकट किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने चीन के पूरे प्रॉपर्टी सेक्टर को प्रभावित किया है। अपने चरम पर कंपनी पर 300 अरब डॉलर (करीब ₹25 लाख करोड़) से अधिक का कर्ज था। 2021 में कंपनी द्वारा कर्ज चुकाने में विफल रहने के बाद से चीन के हाउसिंग मार्केट में गिरावट शुरू हुई, जो अब तक पूरी तरह संभल नहीं पाई है।
जांच के दौरान सामने आया कि कंपनी ने कई वर्षों तक अपने रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। रिपोर्ट्स के अनुसार, 560 अरब युआन (करीब ₹6.5 लाख करोड़) से अधिक की आय को गलत तरीके से दर्शाया गया। इस खुलासे के बाद नियामकों ने सख्ती दिखाते हुए कंपनी के ऑडिट सिस्टम पर भी कार्रवाई की और संबंधित पक्षों पर भारी जुर्माना लगाया।
हुई का सफर बेहद साधारण पृष्ठभूमि से शुरू हुआ था। 1958 में जन्मे इस कारोबारी ने 1996 में एवरग्रांडे की स्थापना की और कुछ ही वर्षों में इसे चीन की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों में शामिल कर दिया। कंपनी ने 280 से अधिक शहरों में 1,300 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स विकसित किए। इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल, स्पोर्ट्स और अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार किया गया, जिससे यह एक बहुआयामी कॉर्पोरेट समूह बन गया।
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हालांकि, आक्रामक विस्तार और भारी कर्ज पर निर्भरता ही कंपनी के लिए घातक साबित हुई। 2020 के बाद सरकार द्वारा कर्ज पर नियंत्रण के लिए सख्त नियम लागू किए गए, जिससे कंपनी की फंडिंग बाधित हो गई। इसके बाद एवरग्रांडे धीरे-धीरे वित्तीय संकट में फंसती चली गई और अंततः डिफॉल्ट कर गई।
दोषी पाए जाने के बाद Hui Ka Yan पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। उन्हें आजीवन पूंजी बाजार से प्रतिबंधित कर दिया गया है और लगभग 47 मिलियन युआन (करीब ₹55 करोड़) का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके अलावा कंपनी के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है।
एवरग्रांडे संकट का असर वैश्विक स्तर पर भी देखा गया है। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, बैंकों और बॉन्ड धारकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। हजारों निवेशकों का पैसा फंस गया और कई हाउसिंग प्रोजेक्ट अधूरे रह गए, जिससे आम खरीदारों की मुश्किलें भी बढ़ गईं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वित्तीय पारदर्शिता की कमी का बड़ा उदाहरण है। एवरग्रांडे का पतन यह दर्शाता है कि अत्यधिक कर्ज और आक्रामक विस्तार की रणनीति लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होती।
अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार है, जो न केवल Hui Ka Yan के भविष्य को तय करेगा, बल्कि चीन के कॉर्पोरेट जगत के लिए भी एक सख्त संदेश साबित हो सकता है।
