कॉल फॉरवर्डिंग और स्पाइवेयर से सेकंडों में उड़ सकती है आपकी जमा पूंजी; विशेषज्ञ की चेतावनी—‘इंसानियत दिखाएं, लेकिन सतर्क रहें’

“एक कॉल और खाली खाता!”: अनजान को मोबाइल देना बन रहा खतरनाक साइबर जाल

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By Roopa
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नई दिल्ली: अगर आप अक्सर किसी अनजान व्यक्ति की “इमरजेंसी कॉल” के नाम पर अपना मोबाइल दे देते हैं, तो अब यह आदत आपको भारी पड़ सकती है। देशभर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच ठगों ने एक नई और बेहद खतरनाक तकनीक विकसित कर ली है, जिसमें सिर्फ एक कॉल के जरिए आपके बैंक खाते, सोशल मीडिया और निजी डेटा तक पहुंच बनाई जा सकती है। बढ़ते खतरे को देखते हुए साइबर यूनिट्स ने लोगों को सतर्क रहने की एडवाइजरी जारी की है।

पहली नजर में यह तरीका बेहद साधारण और भरोसेमंद लगता है, लेकिन इसके पीछे एक सुनियोजित तकनीकी जाल छिपा होता है। ठग आमतौर पर बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पार्क और पर्यटन स्थलों जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों को निशाना बनाते हैं। वे किसी अनजान व्यक्ति से “जरूरी कॉल” करने के लिए मोबाइल मांगते हैं। जैसे ही फोन हाथ में आता है, वे कुछ सेकंड में खास कोड डायल कर देते हैं, जिससे कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिव हो जाती है। इसके बाद आपके फोन पर आने वाले सभी OTP सीधे ठगों के नंबर पर पहुंचने लगते हैं।

कई मामलों में अपराधी इससे भी आगे बढ़कर फोन में चुपके से स्पाइवेयर या की-लॉगर इंस्टॉल कर देते हैं। ये खतरनाक सॉफ्टवेयर यूजर की हर गतिविधि पर नजर रखते हैं—चाहे वह बैंकिंग पासवर्ड हो, लॉगिन डिटेल्स या निजी चैट। धीरे-धीरे ठग आपके पूरे डिजिटल जीवन पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं और पीड़ित को इसकी भनक तक नहीं लगती।

फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन के अनुसार, इस तरह के “क्विक एक्सेस फ्रॉड” देशभर में तेजी से बढ़ रहे हैं। इन अपराधों में सिर्फ कुछ सेकंड का फिजिकल एक्सेस ही बड़े स्तर की डिजिटल ठगी के लिए काफी होता है। संस्था का कहना है कि तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के साथ ऐसे फ्रॉड और अधिक जटिल होते जा रहे हैं, जिससे जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव बनकर उभर रही है।

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यह खतरा सिर्फ आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है। अगर कोई अपराधी आपके फोन का इस्तेमाल गैरकानूनी कॉल या संदिग्ध संदेश भेजने के लिए करता है, तो आपका नंबर जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में आ सकता है। इससे आप अनावश्यक कानूनी उलझनों में फंस सकते हैं और लंबे समय तक मानसिक तनाव झेलना पड़ सकता है।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने इस बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए कहा, “साइबर अपराधी अब सोशल इंजीनियरिंग के जरिए लोगों की भावनाओं का फायदा उठा रहे हैं। ‘इमरजेंसी’ और ‘मदद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर भरोसा बनाया जाता है और फिर तकनीकी तरीके से नुकसान पहुंचाया जाता है। लोगों को समझना होगा कि डिजिटल सुरक्षा में छोटी सी चूक भी बड़ा नुकसान कर सकती है।”

खुद को सुरक्षित रखने के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है। अगर कोई अनजान व्यक्ति कॉल करने के लिए फोन मांगता है, तो सीधे मोबाइल देने से बचें। उसकी जगह आप खुद नंबर डायल करें और स्पीकर मोड पर बात करवाएं, जबकि फोन अपने पास ही रखें। इससे आप मदद भी कर पाएंगे और अपने डिवाइस को सुरक्षित भी रखेंगे।

इसके अलावा, अपने फोन में किसी भी अनजान ऐप को इंस्टॉल होने से रोकें। समय-समय पर सुरक्षा सेटिंग्स की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि कॉल फॉरवर्डिंग या अन्य कोई संदिग्ध फीचर बिना आपकी जानकारी के सक्रिय न हो।

यदि आप इस तरह की साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं। त्वरित कार्रवाई से नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

डिजिटल दौर में दूसरों की मदद करना एक अच्छी बात है, लेकिन अब यह जरूरी हो गया है कि इंसानियत के साथ सतर्कता भी बरती जाए। क्योंकि अब एक छोटी सी मदद भी आपकी पूरी डिजिटल दुनिया को खतरे में डाल सकती है।

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