आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले में बैंक ऑफ बड़ौदा की जंगारेड्डीगुडेम शाखा में करीब ₹10 करोड़ के गोल्ड लोन घोटाले का खुलासा हुआ है। पुलिस ने बैंक के आधिकारिक गोल्ड एप्रेज़र चलापाका राजू (40) को गिरफ्तार किया है। जांच में आरोप है कि उसने गिरवी रखे गए ग्राहकों के असली सोने के आभूषण निकालकर उनकी जगह नकली आभूषण और कम मूल्य वाली धातुएं रख दीं, जिससे लंबे समय तक बैंक प्रबंधन और ग्राहकों को इस धोखाधड़ी की भनक तक नहीं लगी।
मामला तब सामने आया जब बैंक की वरिष्ठ शाखा प्रबंधक ने अनियमितताओं की शिकायत पुलिस से की। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई। इसके बाद बैंक के वॉल्ट का फोरेंसिक ऑडिट कराया गया, जिसमें 176 गोल्ड लोन खातों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं।
जांच के अनुसार आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए व्यवस्थित तरीके से ग्राहकों के गिरवी रखे गए आभूषणों की हेराफेरी की। आंतरिक ऑडिट और दैनिक सत्यापन से बचने के लिए वह असली सोने के स्थान पर नकली गहने और अन्य धातुएं रख देता था। पुलिस के अनुसार इस तरीके से कुल 6.449 किलोग्राम सोना गायब किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹10 करोड़ है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने चोरी किए गए सोने को जंगारेड्डीगुडेम के विभिन्न आभूषण कारोबारियों के यहां बेच दिया या दोबारा गिरवी रख दिया। संदेह से बचने के लिए उसने कई लेनदेन अपने नाम के अलावा अपने माता-पिता के नाम पर भी किए। दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के आधार पर पुलिस ने विभिन्न ज्वेलरी दुकानों से 4.120 किलोग्राम सोने के आभूषण, जिनकी कीमत लगभग ₹5.71 करोड़ आंकी गई है, बरामद कर लिए। इसके अलावा आरोपी के कब्जे से ₹10 लाख नकद भी मिले हैं। इस तरह अब तक कुल ₹5.81 करोड़ की बरामदगी हो चुकी है।
पुलिस का कहना है कि अभी भी 2.329 किलोग्राम सोना बरामद किया जाना बाकी है। इसके लिए विभिन्न स्थानों पर छापेमारी और वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है। साथ ही आरोपी को पुलिस रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की तैयारी की जा रही है कि इस घोटाले में बैंक के किसी अन्य कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति की भी भूमिका थी या नहीं।
प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि आरोपी ने लंबे समय तक विश्वास का लाभ उठाकर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया। पुलिस अब बैंक के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, वॉल्ट संचालन प्रक्रिया और संबंधित वित्तीय दस्तावेजों की भी जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन (FCRF) का कहना है कि गोल्ड लोन से जुड़े मामलों में समय-समय पर स्वतंत्र वॉल्ट ऑडिट, डिजिटल ट्रैकिंग, बहु-स्तरीय सत्यापन और एप्रेज़ल प्रक्रिया की नियमित निगरानी आवश्यक है। संस्थानों में मजबूत आंतरिक नियंत्रण और जवाबदेही व्यवस्था ऐसी वित्तीय धोखाधड़ी के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती है।
फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और शेष सोने की बरामदगी के साथ-साथ संभावित अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
