हरियाणा के गुरुग्राम में साइबर क्राइम पुलिस ने बुजुर्ग दंपति के बैंक खाते से ₹3.14 लाख की साइबर ठगी के आरोप में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से स्नातक और UPSC की तैयारी कर रहे दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों में से एक पीड़ित के बीमार पति की देखभाल के लिए नर्सिंग अटेंडेंट के रूप में काम कर रहा था और उसी दौरान उसने अपने साथी के साथ मिलकर कथित ठगी को अंजाम दिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मैनवेंद्र (26), निवासी कासगंज (उत्तर प्रदेश), और अभिषेक कुमार मौर्य (25), निवासी गोंडा (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। दोनों वर्तमान में दिल्ली के धीरपुर क्षेत्र में रहकर UPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। पुलिस ने मैनवेंद्र को गुरुग्राम और अभिषेक को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने 29 अप्रैल को शिकायत दर्ज कराई थी कि 2 अप्रैल से 12 अप्रैल के बीच उसके बैंक खाते से उसकी जानकारी के बिना कई UPI लेनदेन के माध्यम से ₹3,14,800 निकाल लिए गए। शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाना (पूर्व) में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच में सामने आया कि मैनवेंद्र 1 अप्रैल से पीड़िता के बीमार पति के नर्सिंग अटेंडेंट के रूप में कार्य कर रहा था। इसी दौरान उसने कथित रूप से पीड़ित के मोबाइल फोन में Paytm खाता सक्रिय किया और उसके मोबाइल SIM पर नियंत्रण हासिल कर लिया। इसके बाद उसने अपने साथी अभिषेक के साथ मिलकर पीड़िता के बैंक खाते से राशि ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी।
पुलिस का आरोप है कि चोरी की गई पूरी राशि एक ऑनलाइन बेटिंग/गेमिंग प्लेटफॉर्म पर भेजी गई, जहां दोनों आरोपियों ने कथित रूप से जुए में पूरी रकम गंवा दी।
जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी दिल्ली विश्वविद्यालय से भूगोल (ऑनर्स) में स्नातक हैं और दिल्ली में रहकर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या दोनों किसी बड़े साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े थे या इससे पहले भी ऐसी वारदातों में शामिल रहे हैं।
एल्गोरिथा सिक्योरिटी के एक शोधकर्ता के अनुसार, साइबर अपराधी अब घरेलू सहायकों, केयरगिवर या भरोसेमंद सेवा प्रदाताओं के रूप में घरों तक पहुंच बनाकर डिजिटल भुगतान प्रणालियों का दुरुपयोग करने लगे हैं। किसी भी व्यक्ति को अपने मोबाइल, बैंकिंग ऐप, UPI, SIM या OTP तक अनधिकृत पहुंच नहीं देनी चाहिए। यदि बैंक खाते से कोई संदिग्ध लेनदेन दिखाई दे, तो तुरंत बैंक को सूचित करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
