DRI ने दक्षिण-पूर्व एशिया की सुपारी को बांग्लादेशी मूल का बताकर SAFTA छूट लेने वाले कथित नेटवर्क का खुलासा किया है।

दक्षिण-पूर्व एशिया की सुपारी को बांग्लादेशी बताकर ₹2,500 करोड़ की कस्टम ड्यूटी चोरी, DRI ने 9 को गिरफ्तार किया

Team The420
5 Min Read

नई दिल्ली: राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से भारत में सुपारी आयात कर उसे कथित तौर पर बांग्लादेश मूल की बताकर SAFTA के तहत सीमा शुल्क में छूट हासिल करने वाले एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। करीब एक महीने तक चले खुफिया-आधारित अभियान में जांच एजेंसी ने अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में हाल के वर्षों में सरकार को ₹2,500 करोड़ से अधिक के सीमा शुल्क राजस्व के संभावित नुकसान का खुलासा हुआ है।

जांच के अनुसार, भारत में सामान्य तौर पर सुपारी के आयात पर 100 प्रतिशत Basic Customs Duty (BCD) लागू होती है। हालांकि, SAFTA के तहत पात्र देशों से निर्धारित Rules of Origin की शर्तें पूरी करने वाले आयात पर सीमा शुल्क में छूट मिल सकती है। इसी प्रावधान का कथित तौर पर बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया।

दक्षिण-पूर्व एशिया की सुपारी को बताया बांग्लादेशी

DRI की खुफिया जानकारी के मुताबिक, सिंडिकेट इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से सुपारी खरीदकर भारत में मंगाता था। आरोप है कि आयात दस्तावेजों में इसका मूल देश बांग्लादेश घोषित किया जाता था, ताकि SAFTA के तहत मिलने वाली सीमा शुल्क छूट हासिल की जा सके।

FutureCrime Summit 2026 to Unveil Landmark White Paper on Future Policing & Advanced Cyber Forensics

जांच में सामने आया कि नेटवर्क से जुड़े लोगों ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की सुपारी को पहले बांग्लादेश के एक Export Processing Zone (EPZ) तक पहुंचाया। वहां कथित तौर पर कंटेनर और पैकेजिंग बदलने के बाद माल को बांग्लादेशी मूल का बताकर भारत भेजा जाता था। इसके लिए बांग्लादेशी अधिकारियों से कथित तौर पर फर्जी Certificate of Origin भी हासिल किए गए।

कोलकाता और विशाखापत्तनम में छापेमारी

DRI ने आयातकों, Customs Brokers और Importer Exporter Code (IEC) धारकों से जुड़े कई परिसरों पर कोलकाता और विशाखापत्तनम में एक साथ तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान ऐसे दस्तावेज और अन्य साक्ष्य बरामद होने का दावा किया गया, जिनसे सुपारी के दक्षिण-पूर्व एशियाई मूल का पता चलता है।

जांच एजेंसी ने करीब ₹75 लाख नकद भी बरामद किए। DRI के अनुसार, यह रकम कथित तौर पर अवैध तरीके से आयात किए गए माल की बिक्री से प्राप्त राशि हो सकती है। इसके अलावा करीब 160 मीट्रिक टन सुपारी की एक खेप भी जब्त की गई।

कमीशन लेकर संभालते थे पूरा नेटवर्क

जांच में आरोप है कि नेटवर्क के मास्टरमाइंड भारतीय आयातकों के लिए माल की रूटिंग, दस्तावेज तैयार कराने, सीमा शुल्क निकासी और परिवहन की पूरी व्यवस्था करते थे। इसके बदले उनसे पर्याप्त कमीशन लिया जाता था। एजेंसी को बड़े पैमाने पर नकद भुगतान और वित्तीय लेनदेन के संकेत भी मिले हैं।

जांच में कथित तौर पर हवाला चैनलों और डमी कंपनियों के इस्तेमाल का भी पता चला है। इन माध्यमों के जरिए अवैध कारोबार से हासिल रकम को अलग-अलग खातों और संस्थाओं के बीच भेजकर उसकी वास्तविक उत्पत्ति छिपाने की कोशिश की जाती थी। एजेंसी अब इस वित्तीय नेटवर्क की पूरी कड़ी खंगाल रही है।

Customs Broker का लाइसेंस निलंबित

DRI की जांच में एक Customs Broker फर्म की भूमिका भी सामने आई है। एजेंसी के अनुसार, मामले में चिन्हित अधिकांश संदिग्ध सुपारी आयातों की कस्टम्स क्लीयरेंस प्रक्रिया में इसी फर्म की महत्वपूर्ण भूमिका थी। जांच के बाद सक्षम प्राधिकरण ने संबंधित Customs Broker का लाइसेंस निलंबित कर दिया है।

अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसी आरोपियों की भूमिका, आयातित माल की वास्तविक मात्रा, फर्जी दस्तावेजों की व्यवस्था और वित्तीय लेनदेन के बारे में और जानकारी जुटा रही है।

घरेलू सुपारी कारोबार पर भी असर

DRI ने कहा कि इस तरह का अवैध आयात घरेलू सुपारी उत्पादकों और वैध कारोबार को नुकसान पहुंचा सकता है। कम शुल्क या कथित फर्जी छूट के जरिए बाजार में आने वाला माल कीमतों में असमानता पैदा कर सकता है और नियमों का पालन करने वाले कारोबारियों के लिए प्रतिस्पर्धा मुश्किल बना सकता है।

मामला केवल राजस्व नुकसान तक सीमित नहीं है। सीमा शुल्क नियमों में धोखाधड़ी, फर्जी Certificate of Origin, हवाला और डमी संस्थाओं के इस्तेमाल से जुड़ी गतिविधियां सीमा क्षेत्रों में वैध व्यापार और आर्थिक सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन सकती हैं। DRI की जांच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा वित्तीय लेनदेन का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

हमसे जुड़ें

Share This Article